इस खबर का सार यह है कि हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी प्रोपराइटरशिप फर्म के मालिक की मृत्यु के बाद उसके कानूनी उत्तराधिकारियों से पुराने सर्विस टैक्स की वसूली नहीं की जा सकती, यदि कानून में ऐसी वसूली का स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

मुख्य बिंदु:
- मृतक महेंद्रन रूपेश नायडू एक प्रोपराइटरशिप फर्म चलाते थे।
- वित्तीय वर्ष 2013-14 के सर्विस टैक्स मामले में विभाग ने लगभग ₹10.75 लाख टैक्स और उतनी ही राशि का जुर्माना लगाया था।
- अपील खारिज होने के बाद 3 मई 2023 को उनकी मृत्यु हो गई।
- बाद में जीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग ने उनकी पत्नी और बैंक खातों के खिलाफ रिकवरी नोटिस जारी किया।
- पत्नी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी कि प्रोपराइटरशिप फर्म की अलग कानूनी पहचान नहीं होती और मालिक की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों से ऐसी टैक्स वसूली का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
- हाई कोर्ट ने Rakesh Mohan Pandey की एकल पीठ ने Shabina Abraham बनाम Collector of Central Excise में Supreme Court of India के निर्णय का हवाला देते हुए विभाग का रिकवरी नोटिस रद्द कर दिया।
इस फैसले का महत्व
- यदि कोई व्यक्ति प्रोपराइटरशिप फर्म का मालिक था और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो केवल उसके वारिस होने के आधार पर पुराने सर्विस टैक्स की वसूली नहीं की जा सकती, जब तक संबंधित कानून इसकी अनुमति न देता हो।
- यह निर्णय विशेष रूप से प्रोपराइटरशिप फर्म से जुड़े मामलों पर लागू है। यह अपने-आप कंपनियों, साझेदारी फर्मों या अन्य व्यावसायिक संरचनाओं पर लागू नहीं माना जाएगा।
- साथ ही, यह फैसला उपलब्ध तथ्यों और लागू कानून के आधार पर दिया गया है। किसी अन्य मामले में परिणाम अलग हो सकता है यदि तथ्य या कानूनी प्रावधान भिन्न हों।