बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि महिला के बच्चे उसके सौतेले बेटे हैं, उसे भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने 77 वर्षीय विधवा महिला को राहत देते हुए उसके तीन सौतेले बेटों को हर महीने कुल 9 हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया है।

चीफ जस्टिस की सिंगल बेंच ने सुनाया फैसला
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने कहा कि यदि सौतेली मां संतानहीन और विधवा है तथा स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है, तो उपयुक्त परिस्थितियों में वह अपने सौतेले बेटों से भरण-पोषण की मांग कर सकती है।
कोर्ट ने बिलासपुर फैमिली कोर्ट के 5 अप्रैल 2025 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें महिला का भरण-पोषण संबंधी आवेदन खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि इसी महीने से तीनों सौतेले बेटे अपनी सौतेली मां को 3-3 हजार रुपये प्रतिमाह देंगे।
पति की मौत के बाद बेटों ने देखभाल बंद की
बिलासपुर निवासी 77 वर्षीय सनकैया बाई ने अपने दिवंगत पति पुरुषोत्तम सोनी की संतान और अपने सौतेले बेटों भीषण प्रसाद उर्फ गोवर्धन सोनी, लोचन प्रसाद सोनी और दीपक प्रसाद सोनी के खिलाफ भरण-पोषण का आवेदन दायर किया था।
महिला के मुताबिक, उसके पति की वर्ष 2021 में मृत्यु के बाद तीनों सौतेले बेटों ने उसकी देखभाल करना बंद कर दिया। महिला ने बताया कि वह संतानहीन है और उसके पास अपनी आय का कोई स्वतंत्र साधन भी नहीं है।
बचपन से तीनों बेटों की परवरिश करने का दावा
सनकैया बाई ने फैमिली कोर्ट में बताया था कि तीनों सौतेले बेटे बचपन से उसके साथ रहते थे और उसने उनकी देखभाल एवं पालन-पोषण किया। पति के जीवित रहने तक तीनों बेटे उसकी देखभाल करते थे, लेकिन पति की मृत्यु के बाद उनका व्यवहार बदल गया।
महिला ने यह भी दावा किया कि परिवार की कृषि भूमि से तीनों सौतेले बेटे आय प्राप्त कर रहे हैं। उसने कुछ कृषि भूमि को अपनी और अपने पति की संपत्ति बताते हुए राजस्व दस्तावेज, राशन कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज कोर्ट में पेश किए थे।
फैमिली कोर्ट में बेटों ने नहीं दिया जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट ने तीनों बेटों को नोटिस जारी किया था, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। हाईकोर्ट में भी नोटिस की तामील के बावजूद तीनों बेटे सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हुए।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि संतानहीन विधवा सौतेली मां, जो खुद अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है, उचित परिस्थितियों में सौतेले बेटों से भरण-पोषण मांग सकती है।
इस आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए सनकैया बाई को राहत दी और तीनों सौतेले बेटों को संयुक्त रूप से हर महीने 9 हजार रुपये, यानी प्रत्येक को 3 हजार रुपये देने का निर्देश दिया।