मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के सब रजिस्ट्रार कार्यालय में कथित तौर पर निजी युवकों से संवेदनशील शासकीय कामकाज कराने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दो निजी युवक रजिस्ट्री से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों की जांच करने के साथ ही क्रेता-विक्रेताओं के फोटो और आंखों की आइरिस स्कैन भी ले रहे हैं। मामले ने कार्यालय की गोपनीयता, पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

निजी युवकों को सौंपा मेकर-चेकर का काम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उप पंजीयक कार्यालय सीहोर में धर्मेन्द्र दांगी और गणेश मीणा नाम के दो निजी युवक बैठते हैं। आरोप है कि उनसे रजिस्ट्री प्रक्रिया का संवेदनशील ‘मेकर-चेकर’ कार्य कराया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि दोनों युवक सब रजिस्ट्रार के निजी कंप्यूटर पर रजिस्ट्री से जुड़े गोपनीय दस्तावेज खोलकर उनका अवलोकन करते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों के दस्तावेजों की जांच, फोटो लेने और आंखों की आइरिस स्कैन करने का काम भी वही करते हैं।
नियमों के अनुसार, रजिस्ट्री से जुड़े संवेदनशील कार्य अधिकृत अधिकारियों के जिम्मे होने चाहिए। ऐसे में निजी लोगों से ये काम कराए जाने के आरोपों ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। बताया जा रहा है कि यह व्यवस्था सब रजिस्ट्रार भारतीय काहोड के माध्यम से संचालित हो रही है।
रजिस्ट्री प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल
कार्यालय में कामकाज के तरीके को लेकर आम नागरिकों ने भी सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
नियमों के तहत प्रक्रिया देखने के लिए दो स्क्रीन होनी चाहिए—एक उपभोक्ताओं के लिए बाहर और दूसरी उप पंजीयक के लिए। आरोप है कि सीहोर कार्यालय में दोनों स्क्रीन अंदर लगाई गई हैं, जिससे आम लोगों को रजिस्ट्री की प्रक्रिया देखने का मौका नहीं मिलता।
सब रजिस्ट्रार ने कहा- लड़कों को नहीं जानती
मामले पर जब सब रजिस्ट्रार भारतीय काहोड से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कहा कि यह शासकीय कार्यालय है, जहां रोज कई लोग आते हैं। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि वे इन लड़कों को नहीं जानतीं और कोई भी आकर कुर्सी पर बैठ गया होगा।
वहीं, जिला पंजीयक प्रेम नंदन सिंह ने स्पष्ट किया कि निजी युवकों से शासकीय कार्य कराना नियम विरुद्ध है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही है।
अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कार्यालय में निजी युवकों से किसके निर्देश पर काम कराया जा रहा था और इस मामले में किसकी जिम्मेदारी तय होती है।