बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के दाढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कुरदा के देवगांव में बंदरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। फसलों को बंदरों से बचाने के लिए नियुक्त रखवार पर उन्हें गोली मारने का आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में 20 से अधिक बंदरों की मौत का दावा किया जा रहा है, हालांकि वन विभाग की शुरुआती जांच में घटनास्थल से दो बंदरों के कंकाल मिलने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद चल सकेगा।

फसलों की रखवाली के लिए नियुक्त किया गया था रखवार
जानकारी के मुताबिक, देवगांव में बंदरों से फसलों को बचाने के लिए ग्रामीणों ने करीब तीन से चार महीने पहले राम पारधी नाम के व्यक्ति को रखवार नियुक्त किया था। ग्रामीणों के अनुसार, उसे खेतों की निगरानी करने और बंदरों को फसलों से दूर भगाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
इसके बदले उसे प्रतिमाह करीब 7 हजार रुपये दिए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा, ग्रामीणों की ओर से प्रत्येक राशन कार्ड पर दो किलो चावल देने की व्यवस्था भी थी।
इसी बीच आरोप लगे कि रखवाली के दौरान बंदरों को भगाने के बजाय उन्हें गोली मारकर मारा गया। हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
ग्रामीणों ने गोली मारने के आरोपों से किया इनकार
मामले में गांव के कुछ ग्रामीणों ने बंदरों को गोली मारकर हत्या किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि बंदरों की मौत भूख या किसी अन्य कारण से भी हो सकती है। ग्रामीणों ने रखवार को निर्दोष बताते हुए सवाल उठाया कि उसके पास बंदूक कहां से आई और वह बंदरों को क्यों मारेगा।
ग्रामीणों के मुताबिक, रखवार को केवल फसलों की सुरक्षा और बंदरों को खेतों से दूर रखने के लिए नियुक्त किया गया था। ऐसे में बंदरों की मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
नदी में 10 से 15 बंदरों के शव बहने का दावा
गांव के निवासी जगदीश मानिकपुरी ने दावा किया कि बारिश के दौरान नदी में 10 से 15 बंदरों के शव बहते हुए दिखाई दिए थे। उनके मुताबिक, इस घटना के बाद उन्हें संदेह हुआ कि बंदरों की मौत कैसे हुई और उनके शव नदी में कैसे पहुंचे।
जगदीश मानिकपुरी ने बताया कि उन्होंने मौके पर जाकर बंदरों के अवशेष देखे और इसकी जानकारी वन विभाग को दी। उन्होंने आरोप लगाया कि रखवार को फसलों की रक्षा के लिए नियुक्त किया गया था, न कि वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने के लिए।
हालांकि, नदी में शव बहने और बंदरों को गोली मारने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
कोटवार बोले- तीन से चार महीने पहले हुई थी नियुक्ति
गांव के कोटवार विजय दास मानिकपुरी के अनुसार, ग्रामीणों ने करीब तीन से चार महीने पहले राम पारधी को फसलों की रखवाली के लिए नियुक्त किया था। उसे बंदरों से फसल बचाने और खेतों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
कोटवार ने बताया कि उन्हें बंदरों की मौत के संबंध में पहले जानकारी नहीं थी। मामला सामने आने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और जांच शुरू की।
वन विभाग की टीम ने किया निरीक्षण, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
मामले की सूचना मिलने के बाद दुर्ग और बेमेतरा वन मंडल के करीब 10 से 15 अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। जांच के दौरान दो बंदरों के अवशेष मिलने की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने पंचनामा तैयार कर अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए बेमेतरा भेजा।
फिलहाल बंदरों की मौत की असली वजह स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि बंदरों की मौत किन परिस्थितियों में हुई। रखवार पर लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है।