मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र में जंगलों की कटाई को लेकर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। इंदौर हाईकोर्ट ने चोरल रेंज में विभिन्न परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। ढाई लाख से अधिक पेड़ों की कटाई की आशंका जताने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता करण बैरागी की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव और अधिवक्ता मेहुल वर्मा ने यह जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया है कि चोरल रेंज में प्रस्तावित विभिन्न परियोजनाओं के कारण आने वाले वर्षों में ढाई लाख से अधिक पेड़ काटे जा सकते हैं। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दावा किया गया कि क्षेत्र में अब तक करीब 80 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं।
चोरल रेंज में पेड़ों की कटाई का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
जनहित याचिका में चोरल रेंज में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं उठाई गई हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि इसका असर केवल जंगलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र के पर्यावरण पर पड़ सकता है।
अधिवक्ताओं ने आशंका जताई कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से तापमान में वृद्धि, वर्षा में कमी और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही जंगलों पर निर्भर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित होने की चिंता भी जाहिर की गई।
वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जैव विविधता पर चिंता
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि जंगलों की कटाई से शेरों समेत अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो सकते हैं। याचिका में दुर्लभ प्रजातियों के पेड़ों के विलुप्त होने का खतरा भी जताया गया है।
दलील में यह भी कहा गया कि पुराने जंगलों को काटने से होने वाले पारिस्थितिक नुकसान की भरपाई केवल नए पौधे लगाने से आसानी से नहीं की जा सकती। पुराने जंगलों में विकसित जैव विविधता, वन्यजीवों के लिए उपलब्ध प्राकृतिक आवास और पारिस्थितिक तंत्र बनने में लंबा समय लगता है।
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने लगाई पेड़ों की कटाई पर रोक
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने की। याचिकाकर्ता की ओर से पेश दलीलों पर सुनवाई के बाद अदालत ने चोरल रेंज में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाते हुए केंद्र और राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए।
यह आदेश चोरल रेंज में प्रस्तावित परियोजनाओं और पेड़ों की कटाई को लेकर चल रहे विवाद में महत्वपूर्ण है। अब सरकारों के जवाब और अदालत में रखे जाने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
सवाल सिर्फ पेड़ों का नहीं, पूरे पर्यावरण का
चोरल रेंज में पेड़ों की कटाई को लेकर उठे सवालों में जंगलों का संरक्षण, तापमान पर संभावित असर, वर्षा चक्र, जैव विविधता और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास जैसे मुद्दे शामिल हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पुराने जंगलों को हटाने से होने वाले नुकसान की भरपाई नए पौधे लगाने भर से नहीं हो सकती। हालांकि, पेड़ों की कटाई के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों की वास्तविक सीमा का आकलन वैज्ञानिक अध्ययन और संबंधित विभागों की रिपोर्ट के आधार पर किया जाना होगा।
अब सरकार के जवाब पर टिकी नजर
हाईकोर्ट द्वारा पेड़ों की कटाई पर रोक लगाए जाने और केंद्र तथा राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगे जाने के बाद अब सरकारों का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। मामले में प्रस्तावित परियोजनाओं, पेड़ों की कटाई से संबंधित अनुमतियों, पर्यावरणीय प्रभावों और संरक्षण के उपायों से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं।
फिलहाल याचिका में ढाई लाख से अधिक पेड़ों की कटाई की आशंका और करीब 80 हजार पेड़ पहले ही काटे जाने का दावा प्रमुख मुद्दे हैं। इन दावों की पुष्टि और मामले की आगे की स्थिति सरकारों के जवाब तथा आगामी न्यायिक कार्यवाही से स्पष्ट होगी।