मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास, किसानों को सोयाबीन का उचित मूल्य, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कई अहम फैसले लिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 15 अक्टूबर को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए लगभग 27,050 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी के गठन, भावांतर योजना लागू करने, सांदीपनि विद्यालयों में विद्यार्थियों के परिवहन और विभिन्न विभागों की योजनाओं को जारी रखने सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर के विकास के लिए बनेगी विशेष कंपनी
प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को गति देने के लिए मंत्रि-परिषद ने जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ चयनित औद्योगिक एवं आर्थिक हबों के समेकित विकास के लिए एक विशेष कंपनी गठित करने की मंजूरी दी है। इसका नाम जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड होगा।
यह कंपनी पूर्णतः मध्य प्रदेश शासन के स्वामित्व और नियंत्रण में रहेगी। इसके वित्तीय आधार को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की ओर से 100 करोड़ रुपये की प्रारंभिक चुकता पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी के प्रभावी संचालन और नीतिगत फैसलों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय गवर्निंग काउंसिल गठित की जाएगी। वहीं, मुख्यमंत्री द्वारा नामित और नियुक्त उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में कार्यकारी निकाय कंपनी के कामकाज का संचालन करेगा।
आर्थिक हबों के तेजी से और व्यवस्थित विकास के लिए कंपनी को भूमि की पहचान, भूमि प्रबंधन, भू-अर्जन, भूमि विकास, जोनिंग, मास्टर प्लानिंग, ले-आउट, भू-आवंटन, लीज और सब-लीज, मोनेटाइजेशन तथा बुनियादी और सामाजिक अधोसंरचना विकसित करने से जुड़ी शक्तियां दी जाएंगी।
आवश्यकता के अनुसार राज्य सरकार की भूमि सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से रियायती दर या निर्धारित शर्तों पर कंपनी को उपलब्ध कराई जा सकेगी। यदि परियोजना के लिए वन भूमि की जरूरत होगी, तो संबंधित केंद्रीय और राज्य कानूनों, पूर्वानुमोदन, क्षतिपूर्ति वनीकरण और एनपीवी सहित सभी वैधानिक शर्तें पूरी करने के बाद ही भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी कंपनी
कंपनी को मध्यप्रदेश निवेश क्षेत्र विकास एवं प्रबंध अधिनियम, 2013 के तहत उपयुक्त इन्वेस्टमेंट रीजन एजेंसी के रूप में अधिकृत किया जाएगा। इसके अलावा, मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के अंतर्गत विधि विभाग की सहमति से अधिसूचित आर्थिक हबों के लिए इसे नोडल एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
कंपनी के कार्यक्षेत्र में मुख्य सड़क या कॉरिडोर का निर्माण शामिल नहीं होगा। इसका ध्यान आर्थिक हबों के भीतर आंतरिक एवं साझा अधोसंरचना विकसित करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर रहेगा।
विशेष कंपनी के माध्यम से औद्योगिक पार्क, फूड पार्क, एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, टेक्नोलॉजी एवं आईटी पार्क और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसी साझा सुविधाओं के साथ आवासीय और सामाजिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इनके क्रियान्वयन के लिए पीपीपी, ईपीसी, कन्सेशन, लीज, संयुक्त उपक्रम और डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे वैधानिक मॉडल अपनाए जा सकेंगे।
परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को वित्त, राजस्व, नगरीय विकास एवं आवास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, ऊर्जा, लोक निर्माण, वन और विधि विभाग सहित संबंधित विभागों से समन्वय कर आवश्यक अधिसूचनाएं, शासनादेश और अन्य वैधानिक दस्तावेज जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
खरीफ 2026 में सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर योजना लागू
मंत्रि-परिषद ने खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू करने की मंजूरी दी है। यह योजना भारत सरकार के प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के तहत संचालित प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम (पीडीपीएस) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जाएगी।
योजना का उद्देश्य किसानों को औसत गुणवत्ता वाली सोयाबीन उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करना है। इसका लाभ लेने के लिए किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा।
अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन बेचने की अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक तय की गई है। जरूरत पड़ने पर इस अवधि में संशोधन किया जा सकेगा।
किसानों को भुगतान उनके पंजीकृत रकबे और पिछले वर्ष विभाग द्वारा निर्धारित राज्य स्तरीय औसत उत्पादकता के आधार पर किया जाएगा। जिन किसानों ने योजना अवधि शुरू होने से पहले, यानी 1 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 के बीच मंडी में सोयाबीन बेची है, उस मात्रा को उनकी कुल पात्रता में से घटाया जाएगा। ऐसे किसानों को केवल शेष पात्र मात्रा पर ही भावांतर राशि मिलेगी।
डीबीटी के जरिए किसानों के खातों में पहुंचेगी राशि
भावांतर योजना में भुगतान को पारदर्शी बनाने के लिए मॉडल रेट की व्यवस्था की गई है। सीजन के पहले 14 दिनों के लिए मॉडल रेट प्रदेश की सभी मंडियों के भारित औसत के आधार पर तय होगा। यह दर 22 अक्टूबर 2026 से अगले 14 दिनों तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद पिछले 14 दिनों के भारित औसत के आधार पर प्रतिदिन मॉडल रेट निर्धारित कर ई-मंडी पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा।
योजना के तहत भुगतान की व्यवस्था इस प्रकार होगी:
- बिक्री मूल्य एमएसपी के बराबर या अधिक होने पर: किसान को कोई प्रतिपूर्ति नहीं मिलेगी।
- बिक्री मूल्य एमएसपी से कम, लेकिन मॉडल रेट से अधिक होने पर: एमएसपी और वास्तविक बिक्री मूल्य के अंतर की राशि दी जाएगी।
- बिक्री मूल्य मॉडल रेट के बराबर या उससे कम होने पर: एमएसपी और घोषित मॉडल रेट के अंतर की राशि किसान के पंजीकृत बैंक खाते में सीधे डीबीटी से भेजी जाएगी।
योजना के संचालन के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में क्रियान्वयन समितियां गठित की जाएंगी। भावांतर राशि का भुगतान मंडी बोर्ड द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाएगा। इसकी प्रतिपूर्ति सबसे पहले राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के मूल्य स्थिरीकरण कोष से होगी।
यदि कोष में पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होती है, तो राज्य सरकार मंडी बोर्ड को एक वर्ष के लिए 1,500 करोड़ रुपये की साख सीमा निःशुल्क उपलब्ध कराएगी।
94 सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों के परिवहन के लिए 241.88 करोड़ रुपये
मंत्रि-परिषद ने जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित 94 सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों के परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रुपये मंजूर किए हैं।
इसके तहत प्रति विद्यार्थी परिवहन दर 10,000 रुपये सालाना से बढ़ाकर 21,000 रुपये प्रतिवर्ष की जाएगी। इस राशि में हर साल 5 प्रतिशत की वृद्धि भी की जाएगी। विद्यार्थियों के परिवहन की व्यवस्था आउटसोर्सिंग के माध्यम से आईटी आधारित प्लेटफॉर्म और मॉनिटरिंग प्रणाली के जरिए संचालित की जाएगी।
चार नए जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए नए पद
मंत्रि-परिषद ने नवगठित निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालयों के लिए 24 नए पदों के सृजन और प्रतिस्थापन के माध्यम से 12 पदों की स्वीकृति दी है।
इसके साथ ही समेकित बाल संरक्षण योजना और सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत भारत सरकार की मंजूरी के अनुसार आउटसोर्सिंग के आधार पर मानव संसाधन उपलब्ध कराने की भी स्वीकृति दी गई है।
चार जिलों की सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3,076.37 करोड़ रुपये
मंत्रि-परिषद ने बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली जिलों की सिंचाई परियोजनाओं के निरंतर संचालन के लिए कुल 3,076.37 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इन परियोजनाओं के तहत हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने और मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा।
झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना
बुरहानपुर जिले की झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 922 करोड़ 91 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। परियोजना के तहत जिले की खकनार तहसील के 42 गांवों की लगभग 17,700 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
बारना वृहद सिंचाई परियोजना
रायसेन जिले की बारना वृहद सिंचाई परियोजना के निरंतर संचालन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 82 करोड़ 49 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसका उद्देश्य पहले से निर्मित नहरों का विस्तार, सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण करना है। वर्तमान में इस परियोजना से लगभग 91,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है।
कयामपुर-सीतामऊ सिंचाई परियोजना
मंदसौर जिले की कयामपुर-सीतामऊ दाबयुक्त सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना के लिए 750 करोड़ 83 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। यह राशि वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक परियोजना के निरंतर संचालन के लिए स्वीकृत की गई है। इससे मंदसौर जिले में 1,12,000 हेक्टेयर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
चितरंगी सिंचाई परियोजना
सिंगरौली जिले की चितरंगी दाबयुक्त सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना के निरंतर संचालन के लिए 1,320.14 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। परियोजना के तहत दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के जरिए 32,125 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
विधि एवं विधायी कार्य विभाग की 11 योजनाओं सहित विभिन्न मदों के लिए 15,557.35 करोड़ रुपये
मंत्रि-परिषद ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं को 16वें वित्त आयोग की अवधि, यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 15,557.35 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
इसमें पंजीयक, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अंतर्गत प्रशासनिक अधिकरण, न्यायालयों में कंप्यूटरीकरण और विशेष न्यायालयों से संबंधित योजनाओं सहित कुल 11 योजनाओं के लिए 1,624.69 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 150 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। वहीं, राज्य के जिला एवं सत्र न्यायालयों, सिविल न्यायालयों और अन्य अधीनस्थ न्यायालयों में पदस्थ न्यायिक अधिकारियों तथा न्यायालयीन कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और कार्यालय व्यय के भुगतान से संबंधित योजनाओं के लिए 12,252.66 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। न्यायालय भवनों के निर्माण से संबंधित योजनाओं के लिए 1,530 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
राज्य सूचना आयोग के लिए 71.81 करोड़ रुपये की मंजूरी
मंत्रि-परिषद ने सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत राज्य सूचना आयोग की स्थापना और विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव से संबंधित योजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 71 करोड़ 81 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं।
इसमें राज्य सूचना आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन, भत्तों तथा अन्य व्ययों के लिए 69 करोड़ 61 लाख रुपये और विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 2 करोड़ 20 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
राष्ट्रीय आयुष मिशन के लिए 1,697.62 करोड़ रुपये
मंत्रि-परिषद ने राष्ट्रीय आयुष मिशन को 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि, 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालित करने के लिए 1,697 करोड़ 62 लाख रुपये की स्वीकृति दी है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा आयुष चिकित्सा पद्धति को मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से यह मिशन शुरू किया गया है। प्रदेश में इस योजना के तहत आयुष चिकित्सालयों, औषधालयों और महाविद्यालयों के विकास तथा नए संस्थानों की स्थापना के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध होती है।
राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत स्वीकृत सात आयुर्वेद महाविद्यालयों और जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि से स्वीकृत एक अन्य आयुर्वेद महाविद्यालय का निर्माण डिंडोरी जिले में किया जा रहा है।
आयुष महाविद्यालयों और चिकित्सालयों की योजनाओं के लिए 3,535 करोड़ रुपये
मंत्रि-परिषद ने आयुष विभाग की आयुष महाविद्यालय एवं चिकित्सालय से संबंधित अम्ब्रेला योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 3,535 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
स्वीकृत राशि का विवरण इस प्रकार है:
- आयुष महाविद्यालय से संबंधित योजना के लिए 3,072.54 करोड़ रुपये।
- शासकीय होम्योपैथी महाविद्यालय के लिए 280 करोड़ 5 लाख रुपये।
- यूनानी महाविद्यालय के लिए 182 करोड़ 20 लाख रुपये।
- स्वर्गीय पंडित उद्धवदास मेहता वैद्य शास्त्री आयुर्वेद सम्मान पुरस्कार के लिए 31 लाख रुपये।
इस अम्ब्रेला योजना के अंतर्गत सात आयुर्वेद महाविद्यालयों, एक होम्योपैथी महाविद्यालय और एक यूनानी महाविद्यालय का स्थापना व्यय तथा भवन निर्माण संबंधी कार्य किए जाते हैं।
सरकारी स्कूलों, छात्रावासों और पुस्तकालयों के निर्माण के लिए 2,875.20 करोड़ रुपये
प्रदेश के शासकीय स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों और आवासीय खेलकूद भवनों के निर्माण एवं विस्तार से संबंधित योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए मंत्रि-परिषद ने 2,875.20 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन कुल 7,122 हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं। योजना के तहत इन स्कूलों में शिक्षण कक्ष, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, कंप्यूटर कक्ष, प्राचार्य कक्ष, स्टाफ रूम और कैंपस जैसी सुविधाओं के विकास पर काम किया जाएगा।
इसके अलावा विद्यार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर, ग्रीन बोर्ड, इंटरेक्टिव पैनल और सुरक्षा के लिए कैमरों की व्यवस्था भी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में शैक्षणिक और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है।