November 5, 2026

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर नगर निगम में पेच रिपेयरिंग मशीनों और कचरा कलेक्शन वाहनों की खरीद को लेकर कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महापौर और निगम प्रशासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज पेश करते हुए खरीद प्रक्रिया की जांच की मांग की है।

कांग्रेस पार्षद दल का आरोप है कि मशीनों और वाहनों की खरीद में बाजार मूल्य तथा निगम द्वारा किए गए भुगतान के बीच बड़ा अंतर है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

पेच रिपेयरिंग मशीनों की खरीद पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा के मुताबिक, नगर निगम ने करीब एक साल पहले दो पेच रिपेयरिंग मशीनें खरीदी थीं। उनके द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, संबंधित कंपनी के आधिकारिक कोटेशन में एक मशीन की कीमत 54 लाख 80 हजार रुपये बताई गई थी, जबकि नगर निगम ने प्रत्येक मशीन के लिए 1 करोड़ 10 लाख रुपये का भुगतान किया।

मिश्रा का दावा है कि इस अंतर के आधार पर दोनों मशीनों की खरीद में कुल 1 करोड़ 10 लाख 40 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ। उन्होंने इस खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।

6.67 लाख रुपये की गाड़ी 11.20 लाख में खरीदने का आरोप

कचरा कलेक्शन के लिए खरीदी गई 40 टाटा सीएनजी गाड़ियों (Tata V-20/Intra V20) की कीमत को लेकर भी कांग्रेस पार्षद दल ने अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।

मिश्रा के अनुसार, नगर निगम ने प्रत्येक वाहन के लिए 11 लाख 20 हजार रुपये का भुगतान किया और 40 वाहनों की कुल खरीद लागत 4.48 करोड़ रुपये रही। वहीं, उनके द्वारा बताए गए शोरूम और कंपनी के आधिकारिक कोटेशन के अनुसार, एक वाहन की कीमत 6 लाख 67 हजार रुपये थी।

नेता प्रतिपक्ष का दावा है कि दोनों कीमतों के अंतर से वाहनों की खरीद में बड़े पैमाने पर अतिरिक्त भुगतान हुआ। उन्होंने इस मामले में भुगतान, कोटेशन, टेंडर की शर्तों और खरीद प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।

टेंडर प्रक्रिया में धांधली का आरोप, जांच की मांग

कांग्रेस पार्षद दल और नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के जरिए कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

कांग्रेस पार्षद दल का कहना है कि जांच में यदि वित्तीय गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल, यह मामला कांग्रेस नेता द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत दस्तावेजों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक जवाब के बाद ही हो सकेगी।

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