September 21, 2026

जबलपुर। शहर का नया मास्टर प्लान जारी करने में हो रही लगातार देरी पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने प्रमुख सचिव और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) के डायरेक्टर को शपथ पत्र के माध्यम से जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद जबलपुर का नया मास्टर प्लान अब तक प्रकाशित क्यों नहीं किया गया।

मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

125 गांव अब भी मास्टर प्लान से बाहर

मामले में सामने आया कि हाईकोर्ट ने अप्रैल में हुई सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों को हर हाल में नया मास्टर प्लान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। आदेश का पालन नहीं होने पर कोर्ट पहले ही अवमानना नोटिस जारी कर चुका है। इसके बावजूद अब तक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ है।

जबलपुर का पिछला मास्टर प्लान वर्ष 2008 से प्रभावी था, जिसकी अवधि वर्ष 2021 में समाप्त हो गई। इसके बाद से शहर के लिए नया मास्टर प्लान प्रकाशित नहीं हुआ है।

वर्ष 2014 में जबलपुर नगर निगम की सीमा में 125 गांवों को शामिल किया गया था, लेकिन इन नए क्षेत्रों के सुनियोजित विकास के लिए अब तक कोई नया मास्टर प्लान तैयार नहीं किया गया है।

मास्टर प्लान के अभाव में विकास कार्य प्रभावित

नया मास्टर प्लान नहीं होने के कारण शहर में कई नए प्रोजेक्ट्स की स्वीकृति प्रक्रिया प्रभावित होने की बात सामने आई है। इससे शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर और नियोजित विस्तार पर भी असर पड़ रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि मास्टर प्लान के अभाव में अनियोजित और कथित अवैध निर्माण बढ़ रहे हैं। वहीं, निर्माण परियोजनाओं की स्वीकृति में देरी के कारण सरकारी राजस्व को भी नुकसान होने का दावा किया गया है।

कोर्ट ने अधिकारियों से मांगा जवाब

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय के अनुसार, कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद नया मास्टर प्लान प्रकाशित नहीं किया गया है। उनका कहना है कि इससे आम नागरिकों के साथ-साथ निर्माण और विकास से जुड़े क्षेत्रों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इसी मामले में हाईकोर्ट ने अब प्रमुख सचिव और T&CP डायरेक्टर से शपथ पत्र के जरिए जवाब मांगा है। अदालत यह जानना चाहती है कि पूर्व निर्देशों के बावजूद मास्टर प्लान जारी करने में देरी क्यों हुई और इसे प्रकाशित करने की प्रक्रिया किस स्थिति में है।

मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

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