डोंगरगढ़। किसी डॉक्टर की पहचान सिर्फ उसकी डिग्री या क्लीनिक से नहीं होती, बल्कि मरीजों के प्रति उसके समर्पण और मुश्किल समय में उनके साथ खड़े रहने की भावना से होती है। डोंगरगढ़ के चिकित्सक डॉ. प्रमोद टेंभुर्णिकर ने वर्षों से चिकित्सा सेवा को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाजसेवा का माध्यम माना। अब उनकी बेटी डॉ. अनघा टेंभुर्णिकर ने NEET-PG 2026 में राष्ट्रीय स्तर पर 4576वीं रैंक हासिल कर इस सेवा की विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

डॉ. अनघा ने शासकीय मेडिकल कॉलेज, नागपुर से अपनी चिकित्सा शिक्षा की यात्रा को आगे बढ़ाया। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ डोंगरगढ़ में भी खुशी का माहौल है। हालांकि, उनकी सफलता की कहानी सिर्फ एक प्रतियोगी परीक्षा में मिली रैंक तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पिता को वर्षों तक मरीजों की सेवा करते देखकर मिले संस्कार और प्रेरणा भी जुड़ी है।
कोरोना काल में मरीजों के बीच डटे रहे डॉ. प्रमोद
कोरोना महामारी का दौर चिकित्सा जगत के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। संक्रमण के डर के बीच जब लोग अपने करीबियों से भी दूरी बनाने को मजबूर थे, तब डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के सामने मरीजों की सेवा के साथ अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की चुनौती भी थी।
ऐसे कठिन समय में डॉ. प्रमोद टेंभुर्णिकर ने मरीजों से दूरी बनाने के बजाय उनकी चिकित्सा और मदद को प्राथमिकता दी। कोविड काल में उन्होंने संक्रमित मरीजों और उनके परिजनों की सेवा में सक्रिय भूमिका निभाई। जोखिम के बावजूद मरीजों की देखभाल और उपचार के लिए लगातार काम करते रहे।
उनके लिए चिकित्सा सेवा केवल आजीविका का माध्यम नहीं रही, बल्कि मरीजों के भरोसे और जरूरत के समय उनके साथ खड़े रहने की जिम्मेदारी रही है।
पिता को देखकर सीखा डॉक्टर होने का असली अर्थ
डॉ. अनघा के लिए उनके पिता सिर्फ परिवार के सदस्य नहीं, बल्कि सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे हैं। उन्होंने बचपन से अपने पिता को मरीजों की परेशानियों को समझते और जरूरत के समय उनकी मदद करते देखा।
इसी अनुभव ने उनके भीतर भी चिकित्सा को सेवा से जोड़ने की सोच विकसित की। डॉ. अनघा की सफलता में पढ़ाई और मेहनत के साथ परिवार से मिले संस्कारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
NEET-PG में हासिल की 4576वीं ऑल इंडिया रैंक
डॉ. अनघा टेंभुर्णिकर ने NEET-PG 2026 में ऑल इंडिया 4576वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान परिणाम की चिंता करने के बजाय नियमित पढ़ाई, अनुशासन और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया।
डॉ. अनघा का मानना है कि किसी भी बड़ी सफलता के पीछे एक दिन की मेहनत नहीं, बल्कि लगातार किए गए छोटे-छोटे प्रयास होते हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय निरंतर मेहनत, अनुशासन, लक्ष्य के प्रति विश्वास और माता-पिता के सहयोग को दिया।
अब समाज के अंतिम व्यक्ति तक चिकित्सा सेवा पहुंचाने का लक्ष्य
NEET-PG में मिली सफलता के बाद डॉ. अनघा का लक्ष्य अपने पिता की तरह चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ना और समाज के जरूरतमंद लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
एक तरफ पिता ने अपने लंबे चिकित्सकीय सफर में सेवा को प्राथमिकता दी, वहीं बेटी ने उसी भावना को अपने भविष्य का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया है। NEET-PG 2026 में मिली 4576वीं रैंक इस परिवार के लिए सिर्फ शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंची सेवा की सोच की कहानी भी है।