मध्य प्रदेश के उज्जैन में रावण दहन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन आयोजित करने वाली चार समितियों को अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा है। समाज ने आयोजकों से सात दिन के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा है कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध का उल्लेख किस धर्मशास्त्र या पुराण में मिलता है। जवाब नहीं मिलने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

इस बीच, रावण दहन के विरोध में शहर में पोस्टर भी लगाए गए हैं। दशहरा आयोजन से पहले उठे इस मुद्दे ने उज्जैन में धार्मिक और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है।
महेश पुजारी की ओर से भेजा गया नोटिस
महाकाल मंदिर के पुजारी और अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी ने अधिवक्ता अश्विन चौधरी के माध्यम से चार आयोजक समितियों को नोटिस भिजवाया है।
नोटिस पाने वाली समितियां हैं:
- लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा उत्सव समिति
- कार्तिक मेला दशहरा उत्सव समिति
- सिद्धवट दशहरा समिति
- शास्त्री नगर दशहरा उत्सव समिति
समाज का कहना है कि रावण से संबंधित धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रीय संदर्भों को लेकर उसकी आपत्ति है। इसी आधार पर आयोजकों से रावण दहन की परंपरा और निर्धारित तिथि के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
सात दिन में बताना होगा शास्त्रों का आधार
कानूनी नोटिस में आयोजक समितियों से पूछा गया है कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध होने का उल्लेख किस धर्मशास्त्र और पुराण में मिलता है। समाज ने आयोजकों से इस तिथि पर रावण दहन नहीं करने की मांग भी की है।
नोटिस के मुताबिक, सात दिन के भीतर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। इसमें संभावित हर्जे और खर्चे की जिम्मेदारी आयोजक समितियों पर डालने की चेतावनी भी दी गई है।
रावण दहन से पहले उज्जैन में बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को रावण दहन का आयोजन प्रस्तावित था। इससे पहले ब्राह्मण समाज की ओर से नोटिस भेजे जाने और शहर में विरोध के पोस्टर लगाए जाने के बाद मामला चर्चा में आ गया।
फिलहाल आयोजक समितियों की ओर से नोटिस पर क्या जवाब दिया जाएगा और आगे इस विवाद में क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर नजर बनी हुई है।