रायपुर। नक्सलियों के डंप से बरामद करीब 20 लाख रुपये की कथित हेराफेरी के मामले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बड़ा बयान सामने आया है। मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा है कि पूरे प्रकरण की जांच जारी है। यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मामला कांकेर जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सर्चिंग के दौरान माओवादी डंप से बरामद नकदी से जुड़ा है। आरोप है कि बरामद रकम को नियमानुसार सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय तत्कालीन दो डीएसपी ने कथित तौर पर आपस में बांट लिया। हालांकि, मामले में अभी जांच चल रही है और आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।

मुरागांव के जंगलों में मिला था करीब 20 लाख कैश
जानकारी के मुताबिक, मार्च-अप्रैल के दौरान कांकेर जिले के मुरागांव क्षेत्र के जंगलों में माओवादी डंप की तलाश के लिए अभियान चलाया गया था। इस दौरान टोंडेमरका और मरमाकोनारी में पुलिस टीम को नकदी मिलने की बात सामने आई।
बताया जा रहा है कि दोनों स्थानों से कुल करीब 20 लाख रुपये बरामद हुए थे। एक स्थान से लगभग 15 लाख रुपये और दूसरे स्थान से करीब 5 लाख रुपये मिलने की जानकारी है।
आरोप है कि बरामद रकम को सरकारी प्रक्रिया के तहत जमा कराने के बजाय उसका कथित तौर पर बंटवारा कर लिया गया। मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद प्राथमिक जांच शुरू की गई।
SP ने माना- लाखों रुपये के गबन की मिली जानकारी
कांकेर के पुलिस अधीक्षक निखिल कुमार राखेचा ने बताया कि आमाबेड़ा और कांकेर थाना क्षेत्र के टोंडामरका एवं मरमाकोनारी गांवों से नक्सली डंप से बरामद लाखों रुपये के कथित गबन की जानकारी मिली है।
उन्होंने बताया कि एक स्थान से करीब 15 लाख और दूसरे स्थान से करीब 5 लाख रुपये बरामद हुए थे। मामले की जांच जारी है और आगे की जानकारी जल्द साझा की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, दोनों मामलों की प्राथमिक जांच पूरी कर रिपोर्ट अगस्त में वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। हालांकि, जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है और आगे के निर्देश का इंतजार है।
दोनों तत्कालीन डीएसपी का हो चुका तबादला
सूत्रों के मुताबिक, दोनों तत्कालीन डीएसपी अपनी टीम के साथ नक्सल प्रभावित संवेदनशील क्षेत्र में सर्चिंग अभियान पर गए थे। इसी दौरान माओवादी डंप से नकदी बरामद होने की बात सामने आई।
पुलिस की आंतरिक जांच में बरामद रकम के कथित बंटवारे से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि जून-जुलाई में दोनों डीएसपी का तबादला कोरबा और दंतेवाड़ा किया जा चुका है।
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि आत्मसमर्पित माओवादियों से पूछताछ के दौरान मामले से संबंधित कुछ जानकारी सामने आई थी। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अकेले सर्चिंग पर भी उठ रहे सवाल
मामले में दोनों डीएसपी के आमाबेड़ा क्षेत्र में कथित तौर पर अकेले सर्चिंग पर जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान के दौरान पुलिस बल के साथ बम डिस्पोजल स्क्वॉड (BDS) जैसी विशेषज्ञ टीमों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि ऐसे इलाकों में आईईडी और अन्य विस्फोटकों का खतरा बना रहता है। ऐसे में कथित तौर पर अकेले सर्चिंग पर जाने की बात भी जांच के दायरे में होने की चर्चा है।
CM साय के बयान के बाद कार्रवाई पर नजर
फिलहाल करीब 20 लाख रुपये की बरामदगी और कथित गबन से जुड़े दोनों मामलों की जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों के पास है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में अनियमितता या गड़बड़ी साबित होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब मुख्यमंत्री के बयान के बाद मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और जांच में किन तथ्यों की पुष्टि होती है, इस पर नजर बनी हुई है।