November 8, 2026

भिलाई। नगर निगम भिलाई में पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित अनियमितता के मामले में कार्रवाई का सामना कर रहे अभियंताओं को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने कलेक्टर दुर्ग द्वारा जारी वसूली और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई संबंधी निर्देशों के साथ ही मुख्य अभियंता द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगा दी है। अदालत ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।

29 अनुबंधों की जांच में सामने आई थी गड़बड़ी

दरअसल, नगर निगम भिलाई की परियोजना शाखा के अंतर्गत कराए गए पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत मिली थी। इस शिकायत पर कलेक्टर दुर्ग के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंताओं की संयुक्त टीम ने जांच की थी।

जांच प्रतिवेदन के अनुसार, पेवर ब्लॉक निर्माण के 29 अनुबंधों की जांच में 21 अनुबंधों में माप पुस्तिका में अधिक मात्रा दर्ज किए जाने और मौके पर कम निर्माण पाए जाने की बात सामने आई। जांच में कुल 16 लाख 85 हजार 457 रुपये का अधिक भुगतान दर्ज पाया गया।

इसके बाद कलेक्टर दुर्ग ने 3 सितंबर 2026 को आयुक्त नगर निगम भिलाई को पत्र जारी कर संबंधित अभियंताओं और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा अतिरिक्त भुगतान की राशि वसूलने के निर्देश दिए थे।

सात अभियंताओं को जारी हुआ था कारण बताओ नोटिस

कलेक्टर के पत्र के परिपालन में नगर निगम भिलाई के मुख्य अभियंता ने सात अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इनमें उप अभियंता अर्पित बंजारे, चंदन निर्मल, श्वेता महेश्वर, पुरुषोत्तम सिन्हा, रीमा हुमने, कृष्ण कुमार जंघेल और सहायक अभियंता श्वेता वर्मा शामिल हैं।

इन आदेशों और नोटिस से असंतुष्ट होकर अर्पित बंजारे सहित अन्य अभियंताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट के अधिवक्ता सिबाशीष मिश्रा के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की गई।

अभियंताओं ने उठाया प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का मुद्दा

याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की पीठ में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने पक्ष रखते हुए कहा कि विभाग द्वारा की गई जांच में याचिकाकर्ताओं को शामिल नहीं किया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया।

अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना कारण बताओ नोटिस जारी करना उचित नहीं है। उनका कहना था कि कार्रवाई शुरू होने से पहले ही संबंधित अधिकारियों को दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई और वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए गए थे।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि पूरी कार्रवाई पूर्व निर्धारित मानसिकता के आधार पर की गई है। ऐसे में बिना उनका पक्ष सुने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करना उनके अधिकारों के विपरीत है।

हाईकोर्ट ने वसूली और नोटिस पर लगाई रोक

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कलेक्टर दुर्ग के 3 सितंबर 2026 के पत्र में दिए गए कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई और अतिरिक्त राशि की वसूली संबंधी निर्देशों पर रोक लगा दी। साथ ही मुख्य अभियंता नगर निगम भिलाई द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर भी रोक लगा दी गई है।

अदालत ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, कलेक्टर दुर्ग, नगर निगम भिलाई के आयुक्त, मुख्य अभियंता और कार्यपालन अभियंता को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से फिलहाल संबंधित अभियंताओं को राहत मिली है। मामले में आगे की सुनवाई और विभागीय अधिकारियों के जवाब के बाद अगली स्थिति स्पष्ट होगी।

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