भोपाल/श्योपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को अपने जन्मदिन के अवसर पर देश में चीता पुनर्स्थापना परियोजना (Cheetah Project) की शुरुआत की थी। नामीबिया से आठ चीतों के भारत आगमन के साथ शुरू हुआ यह सफर अब चार साल में नई पीढ़ी के चीतों के जन्म और उनके खुले जंगल में स्वतंत्र जीवन की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
वर्तमान में भारत में कुल 52 चीते मौजूद हैं। इनमें 49 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान और 3 चीते गांधी सागर अभयारण्य में हैं। खास बात यह है कि कुल 52 चीतों में से 32 का जन्म भारत में ही हुआ है, जो परियोजना के तहत भारत में चीता आबादी के बढ़ते कुनबे को दर्शाता है।

नामीबिया से शुरू हुआ सफर, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से बढ़ा कुनबा
चीता पुनर्स्थापना परियोजना के तहत सबसे पहले 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीते भारत लाए गए थे। इसके बाद 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को भारत लाया गया।
चीतों की संख्या बढ़ाने के प्रयास आगे भी जारी रहे। 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से नौ चीते भारत लाए गए। इसके साथ ही भारत में चीता संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम को और विस्तार मिला।
कूनो में 49 चीते, 17 खुले वन क्षेत्र में
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में वर्तमान में 49 चीते मौजूद हैं। इनमें से 17 चीते खुले वन क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं, जबकि 32 चीते क्वारंटीन और सॉफ्ट रिलीज बाड़ों में हैं।
इनमें पांच नर, आठ मादा और एक साल से कम उम्र के 19 शावक शामिल हैं। भारत में जन्मे शावकों की संख्या बढ़ना इस परियोजना के महत्वपूर्ण चरणों में से एक माना जा रहा है।
पहले चुनौती अनुकूलन की, अब प्राकृतिक विस्तार पर फोकस
चीता परियोजना के पहले वर्ष में कूनो की टीम के सामने चीतों को नए वातावरण के अनुकूल बनाने और उनकी लगातार निगरानी की चुनौती थी। दूसरे वर्ष में भारत में चीतों के प्रजनन और शावकों के जन्म के साथ परियोजना को नई गति मिली।
इसके बाद चीतों को खुले जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई। तीसरे वर्ष में चीतों ने बड़े वन क्षेत्र में विचरण किया और अलग-अलग इलाकों को अपनाया। इस दौरान उनकी 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था भी की गई।
अब परियोजना के चौथे वर्ष में फोकस चीतों के प्राकृतिक व्यवहार, स्वतंत्र विचरण और अन्य उपयुक्त क्षेत्रों तक विस्तार पर है। कूनो से आगे गांधी सागर और देश के अन्य संभावित चीता आवासों तक विस्तार को भारत में लंबे समय के लिए चीता आबादी विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
भारत में नई पीढ़ी के चीतों से बढ़ी उम्मीद
चार साल के सफर में परियोजना का फोकस केवल दूसरे देशों से चीते लाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत में उनके प्रजनन और नई पीढ़ी के चीतों को प्राकृतिक वातावरण में विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ा है।
भारत में जन्मे 32 चीतों की मौजूदगी इस बात को रेखांकित करती है कि चीता पुनर्स्थापना परियोजना अब शुरुआती पुनर्वास चरण से आगे बढ़कर चीता आबादी के विकास और विस्तार के अगले चरण में प्रवेश कर रही है।