September 21, 2026

सीहोर। एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भोपाल दौरे के दौरान दिए गए बयानों को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जसपाल सिंह अरोरा ने ओवैसी के बयानों पर आपत्ति जताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भोपाल में दिए गए बयानों का जवाब उनके गढ़ हैदराबाद में जाकर दिया जाएगा।

मिसाइल वाले बयान पर जसपाल अरोरा ने दी सफाई

सीहोर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जसपाल सिंह अरोरा ने अतिक्रमण और मिसाइल से जुड़े बयान पर भी स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत देने के लिए ‘मिसाइल’ शब्द का इस्तेमाल मुहावरे के तौर पर किया गया था। उनका कहना था कि इसका अर्थ वास्तविक रूप से मिसाइल दागना नहीं था।

दरअसल, भोपाल के काजी कैंप को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और ओवैसी के बीच भी बयानबाजी हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, शर्मा ने बाद में अपने ‘मिसाइल’ वाले बयान को इस्लामाबाद के काजी कैंप से जोड़कर स्पष्टीकरण दिया था। इसके बाद ओवैसी ने भोपाल में आयोजित सभा के दौरान शर्मा को चुनौती दी।

‘भोपाल की गंगा-जमुनी तहजीब बरकरार रहेगी’

अरोरा ने कहा कि भोपाल की पहचान गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक भाईचारे से है। उनके मुताबिक, शहर में हिंदू और मुस्लिम समुदाय लंबे समय से मिल-जुलकर रहते आए हैं और यह सामाजिक एकता आगे भी कायम रहनी चाहिए।

उन्होंने ओवैसी पर मुस्लिम समुदाय को भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसी कोशिशें सफल नहीं होंगी। ये आरोप अरोरा के राजनीतिक बयान हैं।

ओवैसी के दोबारा भोपाल आने पर दी चेतावनी

अरोरा ने ओवैसी की भाषा पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि ओवैसी दोबारा भोपाल आते हैं तो उनका विरोध किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ओवैसी को भोपाल में स्टेशन से बाहर कदम नहीं रखने दिया जाएगा और उनके कपड़े फाड़ने जैसी आपत्तिजनक टिप्पणी भी की।

अरोरा ने कहा कि ओवैसी के बयानों को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं और भोपाल के लोगों में आक्रोश है। उन्होंने दोहराया कि जवाब हैदराबाद जाकर दिया जाएगा।

हालांकि, अरोरा की ओर से कही गई ये बातें राजनीतिक चेतावनी और बयान हैं; इनसे किसी वास्तविक विरोध या कार्रवाई का होना स्वतः स्थापित नहीं होता। हालिया बयानबाजी ओवैसी और भाजपा नेताओं के बीच काजी कैंप तथा मिसाइल संबंधी टिप्पणियों को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद का हिस्सा है।

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