मध्य प्रदेश में परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और पेपर लीक, नकल व परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए राज्य सरकार ने चार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का फैसला लिया है। इन अदालतों का उद्देश्य ऐसे मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना है। सरकार ने चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

इस व्यवस्था के तहत प्रदेश के चार प्रमुख संभागों में विशेष अदालतें बनाई जाएंगी। इसके साथ ही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों की जांच के लिए प्रत्येक जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की भी योजना है।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में बनेंगी विशेष अदालतें
सरकार की योजना के अनुसार, चार फास्ट ट्रैक कोर्ट अलग-अलग क्षेत्रों के मामलों की सुनवाई करेंगी। प्रस्तावित न्यायक्षेत्र का विवरण इस प्रकार है:
- भोपाल कोर्ट: भोपाल, सीहोर, रायसेन, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, राजगढ़ और विदिशा जिलों से जुड़े मामले।
- इंदौर कोर्ट: इंदौर, धार, रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, उज्जैन और देवास सहित मालवा-निमाड़ क्षेत्र के मामले।
- ग्वालियर कोर्ट: ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, दतिया, अशोकनगर और टीकमगढ़ से जुड़े मामले।
- जबलपुर कोर्ट: जबलपुर, सागर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा, शहडोल तथा महाकौशल-बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्य जिलों से संबंधित मामले।
इन अदालतों के माध्यम से पेपर लीक, नकल कराने और परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई को गति देने का लक्ष्य रखा गया है।
चार्जशीट के बाद 3 महीने में ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य
विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के पीछे प्रमुख उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों के मामलों का जल्द निपटारा करना है। सरकार ने चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।
इसके लिए विशेष अभियोजकों की नियुक्ति की जाएगी। उनकी जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने पर केंद्रित रहेगी, ताकि सुनवाई में अनावश्यक देरी से बचा जा सके।
हर जिले में SP के नेतृत्व में बनेगी SIT
परीक्षा में गड़बड़ी और नकल से जुड़े मामलों की जांच को प्रभावी बनाने के लिए हर जिले में पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की योजना भी शामिल है। इससे पेपर लीक, नकल कराने और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की जांच को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना तथा नकल माफिया और सॉल्वर गैंग से जुड़े मामलों में कार्रवाई तेज करना है।