November 4, 2026

मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में गांजे की अवैध खेती के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। ग्राम कलमोड़ा के पहाड़ी इलाके में तीन दिनों तक चले अभियान के दौरान पुलिस ने 15,609 गांजे के पौधे जब्त किए। पुलिस के मुताबिक, जब्त पौधों का कुल वजन 99 क्विंटल से अधिक है और उनकी अनुमानित कीमत करीब 9 करोड़ 42 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार ने इसे जिले में एनडीपीएस से जुड़ी बड़ी कार्रवाई बताते हुए कहा कि मामले में तीन आरोपियों की पहचान की गई है, जो फिलहाल फरार हैं।

यह कार्रवाई कोतवाली थाना क्षेत्र की पारा चौकी के अंतर्गत आने वाले ग्राम कलमोड़ा में की गई। पुलिस को सूचना मिली थी कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में गैरकानूनी तरीके से गांजे की खेती की जा रही है। इसके बाद विशेष दल गठित कर इलाके में दबिश दी गई।

तीन दिन तक चला अभियान, 15,609 पौधे मिले

पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार ने प्रेस वार्ता में बताया कि मुखबिर से सूचना मिलने के बाद भारी पुलिस बल के साथ ग्राम कलमोड़ा में कार्रवाई शुरू की गई। अभियान लगातार तीन दिनों तक चला। इस दौरान पहाड़ी क्षेत्र की तलहटी में बड़े पैमाने पर गांजे के पौधे पाए गए।

पुलिस के अनुसार, कुल 15,609 पौधे जब्त किए गए, जिनका वजन 99 क्विंटल से अधिक और अनुमानित कीमत करीब 9.42 करोड़ रुपये है। पुलिस का कहना है कि खेती दुर्गम इलाके में की जा रही थी, जो आम लोगों की पहुंच से दूर है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, खेती के लिए पट्टे की जमीन के साथ वन क्षेत्र से जुड़ी जमीन का भी इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। पुलिस इस पहलू की जांच कर रही है कि खेती किन जमीनों पर की जा रही थी और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।

झाबुआ और धार जिले की सीमा से जुड़ा है इलाका

पुलिस के मुताबिक, गांजे की अवैध खेती से जुड़ा क्षेत्र झाबुआ और धार जिलों की सीमा के आसपास फैला हुआ है। इसका एक हिस्सा झाबुआ जिले के ग्राम कलमोड़ा में आता है, जबकि दूसरा हिस्सा धार जिले की सीमा में स्थित बताया गया है।

झाबुआ पुलिस ने अपने क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में गांजे के पौधे जब्त किए हैं। सीमा से सटे इलाके में खेती किए जाने के कारण जांच में जमीन के स्वामित्व, इस्तेमाल और संभावित नेटवर्क से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

तीन आरोपी फरार, एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई

पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार ने बताया कि इस मामले में वेलसिंग डामोर, भरत डामोर और बापू पिता मौहरिया डामोर को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, तीनों आपस में भाई हैं और फिलहाल फरार हैं।

मामले में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि अवैध गांजे की खेती से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।

विशेष दल ने संभाली कार्रवाई की कमान

गांजे की अवैध खेती के खिलाफ अभियान के लिए पुलिस ने विशेष दल गठित किया था। कार्रवाई में एसडीओपी मोनिका सिंह, कोतवाली थाना प्रभारी रमेशचंद्र भास्करे, चौकी प्रभारी निरीक्षक पल्लवी भाभर, राणापुर थाना प्रभारी निरीक्षक कैलाशचंद्र सीरवी, निरीक्षक राजेंद्र सिंह भदोरिया, एसएएफ बटालियन निरीक्षक राम मंडलोई और चौकी प्रभारी पेटलावद उपनिरीक्षक अशोक बघेल सहित अन्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका रही।

पुलिस ने इस कार्रवाई को नशा मुक्त भारत अभियान के तहत अवैध गांजा उत्पादन के खिलाफ अहम कदम बताया है। अधिकारियों का कहना है कि गांजे की खेती से जुड़े नेटवर्क की पहचान कर आरोपियों को गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

झाबुआ पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गांजे की खेती कब से की जा रही थी, इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और तैयार उपज की आपूर्ति कहां की जानी थी। साथ ही, झाबुआ-धार सीमा से लगे क्षेत्र में अवैध खेती के विस्तार और जमीन के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।

फिलहाल पुलिस की कार्रवाई में 15,609 पौधों की जब्ती और करीब 9.42 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत सामने आई है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और संभावित नेटवर्क की पहचान के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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