November 6, 2026

सुकमा। आंध्र प्रदेश की पोलावरम बहुउद्देशीय परियोजना के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी सुकमा और प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने आदिवासी हितों की रक्षा सहित सात सूत्रीय मांगों को लेकर राज्यपाल के नाम कलेक्टर सुकमा को ज्ञापन सौंपा। नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर पूरे बस्तर में आंदोलन तेज किया जाएगा।

जनक ध्रुव के नेतृत्व में जुटे कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता

प्रदेश आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष जनक ध्रुव के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें जिलाध्यक्ष हरीश लखमा कवासी, बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, राष्ट्रीय महिला कांग्रेस सचिव तूलिका कर्मा, आदिवासी कांग्रेस जिला अध्यक्ष वेको हुंगा और कोंटा ब्लॉक अध्यक्ष शेख नूरा अली सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने पोलावरम परियोजना से बस्तर क्षेत्र के आदिवासी समुदायों और उनकी जमीन पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई।

पोलावरम के बैकवॉटर से आदिवासी गांवों के डूबने की आशंका

ज्ञापन में कांग्रेस ने दावा किया कि पोलावरम बांध के बैकवॉटर से छत्तीसगढ़ के सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों के सैकड़ों आदिवासी गांव प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी ने हजारों एकड़ कृषि भूमि, घरों और वन भूमि के जलमग्न होने की आशंका भी जताई।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इससे आदिवासी समुदायों की संस्कृति और परंपराओं पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने इस मुद्दे को पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (PESA) और वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों से जोड़ते हुए प्रभावित परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की।

कांग्रेस की सात प्रमुख मांगें

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार के सामने ये मांगें रखीं:

  1. डूब क्षेत्र का दोबारा सर्वे: पोलावरम परियोजना से संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों का पुनः सर्वे कराया जाए।
  2. पुनर्वास और मुआवजा: प्रभावित परिवारों के लिए ठोस पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था होने तक बांध निर्माण रोका जाए।
  3. केंद्र सरकार का हस्तक्षेप: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार हस्तक्षेप करे।
  4. वन अधिकार पट्टा: पात्र हितग्राहियों को नए वन अधिकार पट्टे जारी किए जाएं।
  5. आदिवासी बंदियों की रिहाई: जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों को रिहा किया जाए।
  6. रोजगार के अवसर: स्थानीय भर्ती में बेरोजगारों को प्राथमिकता दी जाए और बेरोजगारी भत्ता दिया जाए।
  7. बिजली व्यवस्था: स्मार्ट मीटर हटाए जाएं और हर गांव तक बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मांगें नहीं मानी गईं तो बस्तर में आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पोलावरम परियोजना से संभावित रूप से प्रभावित आदिवासी परिवारों के अधिकारों और आजीविका की सुरक्षा जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आदिवासी कांग्रेस पूरे बस्तर क्षेत्र में उग्र आंदोलन करेगी।

फिलहाल प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन कलेक्टर को सौंपकर अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं।

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