भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवादी ढांचों के विरुद्ध कार्रवाई कर अपने साहस, कौशल और सैन्य दक्षता का परिचय दिया। विजयादशमी पर हम अपने वीर जवानों को नमन करते हुए उनकी कर्तव्यनिष्ठा से प्रेरणा लें। राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए समर्पित सैनिकों का पराक्रम हमें याद दिलाता है कि देशसेवा सर्वोच्च दायित्वों में से एक है।

सैनिकों और उनके परिवारों के त्याग को नमन
सीमा पर तैनात सैनिक का जीवन त्याग, अनुशासन और तपस्या की मिसाल है। जब देशवासी अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाते हैं, तब अनेक सैनिक अपने घरों से दूर रहकर देश की सुरक्षा में जुटे होते हैं। हमारे घरों का उत्सव उनकी सतर्कता और समर्पण से मिलने वाले सुरक्षा-बोध से जुड़ा है।
सैनिकों के साथ उनके परिवारों का धैर्य और योगदान भी सम्मान के योग्य है। वीर नारियों और सैन्य परिवारों के त्याग को स्मरण करना हमारी राष्ट्रीय चेतना का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। उनके प्रति कृतज्ञता केवल शब्दों तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे नागरिक आचरण में भी दिखाई दे।
मध्यप्रदेश में सुशासन का लक्ष्य: सुरक्षा, सम्मान और कल्याण
मध्यप्रदेश में सुशासन के प्रयासों का केंद्र नागरिकों का सम्मान, सुरक्षा और कल्याण है। माताओं-बहनों को निर्भय वातावरण मिले, युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के अवसर प्राप्त हों, किसानों के परिश्रम को समृद्धि का आधार मिले और जरूरतमंदों तक शासन की सहायता पहुंचे—यही हमारा संकल्प है।
शासन की वास्तविक सफलता इस बात से आंकी जाती है कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया। नागरिकों को समय पर न्याय, सहज सेवाएं और आगे बढ़ने के अवसर मिलना आवश्यक है। जब शासन जनकल्याण को प्राथमिकता देता है, तब रामराज्य की भावना लोकजीवन में साकार होने की दिशा में आगे बढ़ती है।
रावण दहन के साथ बुराइयों से मुक्ति का संकल्प
विजयादशमी केवल बाहरी बुराइयों पर विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है। रावण दहन के साथ हमें अहंकार, लोभ, भेदभाव और कर्तव्य के प्रति उदासीनता से मुक्त होने का संकल्प लेना चाहिए।
ईमानदारी को व्यवहार में, सद्भाव को संबंधों में और अनुशासन को दिनचर्या में स्थान देना होगा। समाज की एकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। प्रत्येक नागरिक का सम्मान और राष्ट्रहित के प्रति साझा समर्पण ही भारत को मजबूत आत्मबल प्रदान करता है।
सत्य, शक्ति और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ मनाएं विजयादशमी
आइए, इस विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन के साथ अपने संकल्पों को भी नई धार दें। भगवान श्रीराम की मर्यादा, मां दुर्गा की शक्ति और वीर सैनिकों का साहस हमारा मार्ग प्रकाशित करे। हम सत्य के पक्ष में खड़े हों, न्याय के लिए कार्य करें और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करते हुए राष्ट्र को सशक्त बनाएं।
शक्ति से सुरक्षा, सामर्थ्य से समृद्धि और सत्य से विजय के संकल्प के साथ हम भारत के गौरवशाली भविष्य के निर्माण में योगदान दें। सभी प्रदेशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक मंगलकामनाएं।
लेखक: डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश