November 4, 2026

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत से पहले उज्जैन पहुंचे। यहां उन्होंने मां हरसिद्धि मंदिर, काल भैरव मंदिर और बड़े गणेश मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। खास बात यह रही कि दिग्विजय सिंह ने आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में लगकर दर्शन किए। उनकी प्रस्तावित यात्रा उज्जैन से अयोध्या तक जाएगी। प्रेस वार्ता में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा राजनीतिक नहीं है और इसमें कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता है।

उज्जैन प्रवास के दौरान दिग्विजय सिंह ने प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यात्रा के उद्देश्य और अपनी मांगों के बारे में जानकारी दी। इस दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े पूर्व कारसेवक संतोष दुबे भी मौजूद रहे।

20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक यात्रा का ऐलान

दिग्विजय सिंह ने बताया कि सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत 20 अक्टूबर, मंगलवार को महाकालेश्वर मंदिर से होगी। यात्रा उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य धार्मिक आस्था, जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को उठाना है। उन्होंने इसे गैर-राजनीतिक यात्रा बताते हुए कहा कि इसमें किसी भी व्यक्ति की भागीदारी हो सकती है।

कौन हैं संतोष दुबे, जो यात्रा में होंगे शामिल?

प्रेस वार्ता में दिग्विजय सिंह ने पूर्व कारसेवक संतोष दुबे का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, 2 नवंबर 1990 को राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान कारसेवा में संतोष दुबे को चार गोलियां लगी थीं। उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर 1992 की घटना में भी दुबे घायल हुए थे और उनकी कई हड्डियां टूट गई थीं।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि संतोष दुबे राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े चर्चित पूर्व कारसेवकों में शामिल रहे हैं और वह सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा में भी हिस्सा लेंगे।

राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर दिग्विजय सिंह की 5 मांगें

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय सिंह ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था, कथित अनियमितताओं और जवाबदेही को लेकर पांच मांगें रखीं। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  1. राम जन्मभूमि ट्रस्ट को भंग करने की मांग: दिग्विजय सिंह ने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को तत्काल भंग कर मंदिर की व्यवस्था का दायित्व रामालय ट्रस्ट को सौंपने की मांग की। उन्होंने कहा कि इसमें विभिन्न पीठों के शंकराचार्यों, रामानंद संप्रदाय के संतों, निर्मोही अखाड़े के प्रमुख और गोरखनाथ मठ के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए।
  2. कथित चढ़ावा चोरी की जांच: उन्होंने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की घटनाओं को लेकर ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव, कोषाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने तथा उनकी भूमिका की जांच करने की मांग की।
  3. राजनेताओं और सांप्रदायिक संगठनों के सदस्यों को जिम्मेदारी न देने की मांग: दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट में किसी राजनेता या सांप्रदायिक संगठनों के सदस्य को पदाधिकारी नहीं बनाया जाना चाहिए और न ही उन्हें कोई जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
  4. प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल: उन्होंने राम मंदिर से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इस मामले में स्पष्ट जवाब और कार्रवाई जरूरी है।
  5. निष्पक्ष कार्रवाई और पारदर्शिता की मांग: दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री से पूरे मामले में निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के नाम पर किसी भी प्रकार की कथित लूट, भ्रष्टाचार या अनियमितता को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

ये मांगें दिग्विजय सिंह द्वारा प्रेस वार्ता में रखी गईं। राम मंदिर ट्रस्ट या संबंधित पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है।

‘वोट चोरी’ और चंदा चोरी के आरोपों पर भी उठाया मुद्दा

दिग्विजय सिंह ने प्रेस वार्ता में कथित वोट चोरी और चंदा चोरी के मामलों की निष्पक्ष जांच तथा जवाबदेही की मांग को लेकर एक डिजिटल पिटीशन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्ष चुनाव के पक्षधर हैं।

उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई। इन मांगों के समर्थन में उन्होंने मोबाइल नंबर 8982121282 जारी करते हुए लोगों से मिस्ड कॉल करने की अपील की।

महाकाल मंदिर के पास सरकारी जमीन पर RSS के कब्जे का आरोप

प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने महाकाल मंदिर के नजदीक स्थित शासकीय भूमि पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कब्जे का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि वहां होटल का निर्माण कर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की गई हैं। दिग्विजय सिंह ने इस संबंध में प्रमाण प्रस्तुत करने की बात कही।

हालांकि, सरकारी भूमि पर कब्जे और निर्माण से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच से स्पष्ट होगी।

धार्मिक आस्था और जवाबदेही के मुद्दों पर केंद्रित रहेगी यात्रा

दिग्विजय सिंह के मुताबिक, सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के माध्यम से राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था, कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे। उज्जैन में मंदिरों के दर्शन के बाद हुई प्रेस वार्ता में उन्होंने यात्रा को गैर-राजनीतिक बताया और लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की।

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