क्या है मामला?
बालाघाट के बैहर विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बहुल गांव बोंदारी, कोरका और कुंडेकसा में पिछले करीब डेढ़ महीने से बच्चों के बीमार होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन ने 7 बच्चों की मौत की पुष्टि की है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पत्र में 11 बच्चों की मौत का दावा किया है। इसलिए दोनों आंकड़ों को अलग-अलग स्रोतों के दावे के रूप में देखना जरूरी है।
दिग्विजय सिंह ने CM को लिखा पत्र
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर:
- प्रभावित गांवों में तत्काल मेडिकल कैंप और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भेजने की मांग की।
- गंभीर बच्चों को जरूरत पड़ने पर नागपुर, रायपुर या भोपाल एयरलिफ्ट कराने की मांग की।
- मृत बच्चों के परिवारों को ₹10-₹10 लाख की सहायता देने की मांग की।
- पूरे मामले की राज्य स्तरीय जांच कर लापरवाही के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
- दूषित पानी और संक्रमण की स्थिति की जांच कराने की मांग की।
उन्होंने ‘हर घर नल से जल’ योजना को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए हैं।

बड़ी संख्या में बच्चे अस्पताल में भर्ती
प्रशासन की जानकारी के अनुसार प्रभावित वनग्रामों से बड़ी संख्या में बच्चों को उपचार के लिए बालाघाट जिला अस्पताल लाया गया है। खबर में 100 से अधिक बच्चों के उपचार का उल्लेख है, जबकि वर्तमान में भर्ती बच्चों और गंभीर मरीजों की संख्या अलग-अलग समय पर बदल सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के साथ मेडिकल कॉलेज जबलपुर और ICMR की टीम द्वारा मरीजों और उनके परिजनों की काउंसलिंग किए जाने की भी जानकारी दी गई है।
बीमारी की वजह क्या है?
दिग्विजय सिंह ने दूषित पानी और संक्रमण को संभावित कारण बताते हुए मलेरिया, निमोनिया, तेज बुखार, सर्दी-खांसी और त्वचा संबंधी समस्याओं का उल्लेख किया है। हालांकि बच्चों की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण जांच और मेडिकल रिपोर्ट से स्पष्ट होना बाकी है। इसे अभी निश्चित रूप से दूषित पानी से हुई मौत कहना उचित नहीं होगा।
कमलनाथ ने भी मांगी सहायता
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रभावित बच्चों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने और मृत बच्चों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में शिविर और निगरानी शुरू की है। अब बच्चों को गांव में उपचार देने के साथ-साथ जिला अस्पताल लाकर इलाज कराने पर जोर दिया जा रहा है।
सबसे अहम बात: इस मामले में 7 मौतों की प्रशासनिक पुष्टि और 11 मौतों का राजनीतिक दावा अलग-अलग हैं। खबर प्रकाशित करते समय इस अंतर को स्पष्ट रखना जरूरी है, ताकि अपुष्ट संख्या को तथ्य के रूप में प्रस्तुत न किया जाए।