रायपुर। रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की लाभांडी-कचना-सडडू नगर विकास योजना में भूखंडों के आवंटन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। RDA की वेबसाइट पर सामने आई आवंटन संबंधी जानकारी के आधार पर रायपुर के ईएनटी विशेषज्ञ और समाजसेवी डॉ. राकेश गुप्ता ने कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी कंपनी राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को कचना की जमीन के बदले सडडू में करीब 20 करोड़ रुपए मूल्य का भूखंड दिया जा रहा है।

हालांकि, RDA ने इन आरोपों को लेकर कहा है कि नगर विकास योजना में भूखंडों का आवंटन निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत किया गया है। RDA के CEO अवनीश शरण ने दावा-आपत्ति की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया है।
राधिका पैलेस को सडडू में प्लॉट आवंटित करने का दावा
डॉ. राकेश गुप्ता के मुताबिक, राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को सडडू में प्लॉट नंबर 25 आवंटित किया जा रहा है। इसकी भूमि का क्षेत्रफल 2168 वर्गमीटर यानी करीब 23,327 वर्गफीट बताया गया है।
डॉ. गुप्ता का दावा है कि यह भूखंड मुख्य चौराहे के नजदीक है और प्रस्तावित 150 फीट चौड़ी MR-43 सड़क पर स्थित है। उनका कहना है कि इस वजह से भविष्य में इस जमीन का बाजार मूल्य काफी अधिक हो सकता है।
10 हजार रुपए प्रति वर्गफीट तक कीमत पहुंचने का दावा
डॉ. गुप्ता ने अनुमान जताया है कि MR-43 सड़क के निर्माण के बाद इस इलाके में जमीन की कीमत करीब 10 हजार रुपए प्रति वर्गफीट तक पहुंच सकती है। इस अनुमान के आधार पर 23,327 वर्गफीट के भूखंड की कीमत करीब 20 करोड़ रुपए बैठने का दावा किया गया है।
उन्होंने राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड के पंजीकृत कार्यालय और कंपनी में शेयर होल्डिंग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। डॉ. गुप्ता के अनुसार, कंपनी का पंजीकृत कार्यालय जगदलपुर में बताया गया है और मंत्री की पत्नी कंपनी में निदेशक हैं। उन्होंने वर्ष 2023 के चुनावी शपथ पत्र का भी हवाला दिया है।
कचना में 1.33 एकड़ जमीन के बदले सडडू में प्लॉट देने का आरोप
डॉ. गुप्ता के मुताबिक, राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड की करीब 1.33 एकड़ जमीन कचना के नालापारा इलाके में है। उनका आरोप है कि इस जमीन तक पहुंचने के लिए बस्ती के संकरे रास्ते से होकर जाना पड़ता है, जिसके कारण जमीन का बाजार मूल्य सीमित था।
उनका दावा है कि RDA ने इस जमीन को नगर विकास योजना में शामिल करने के लिए बीच में आने वाली अन्य निजी जमीनों को भी योजना का हिस्सा बनाया। आरोप के मुताबिक, कचना की संबंधित जमीन को योजना में प्लॉट नंबर 71 दिया गया है और इसे पब्लिक एमेनिटी के लिए आरक्षित बताया गया है।
कानून की धारा का हवाला देकर उठाए सवाल
डॉ. राकेश गुप्ता ने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50(3)(ii)(f) और (g) का हवाला देते हुए फाइनल प्लॉट के आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि पुनर्गठित अंतिम भू-खंड मूल भूमि में या उससे लगे किसी भू-खंड में दिया जाना चाहिए। आरोप है कि कचना स्थित जमीन के बदले राधिका पैलेस को सडडू में भूखंड दिया जा रहा है, जो मूल जमीन से करीब एक किलोमीटर दूर है।
हालांकि, इन कानूनी प्रावधानों की व्याख्या और आवंटन प्रक्रिया की वैधानिकता का अंतिम निर्धारण संबंधित सक्षम प्राधिकारी या न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही हो सकता है।
प्रभावशाली लोगों को प्रमुख स्थानों पर भूखंड देने का भी आरोप
डॉ. गुप्ता ने योजना के अन्य आवंटनों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जिन भू-स्वामियों की जमीन MR-43 जैसी प्रमुख सड़क पर थी, उनमें से कुछ को सड़क से हटाकर योजना के अंदरूनी हिस्से में अपेक्षाकृत कम मूल्य वाले भूखंड दिए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को योजना के तहत अधिक मूल्यवान स्थानों पर भूखंड दिए जाने से पूरी पुनर्गठन और आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
मुख्य सचिव से जांच की मांग
डॉ. गुप्ता ने पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। उन्होंने लाभांडी-कचना-सडडू नगर विकास योजना को निरस्त करने और भूखंडों के आवंटन की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग रखी है।
RDA CEO बोले- दावा-आपत्ति के लिए प्रक्रिया जारी
वहीं, RDA के CEO अवनीश शरण ने कहा कि नगर विकास योजना के तहत जिन लोगों की जमीन योजना में शामिल होती है, उन्हें नियमानुसार भूखंड आवंटित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना में भी 2,000 वर्गमीटर से अधिक जमीन वाले भू-स्वामियों को मुख्य सड़क की ओर भूखंड आवंटित किए गए हैं और ऐसे कई मामले हैं।
CEO के मुताबिक, आवंटन को लेकर दावा-आपत्ति मंगाई गई है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया नगर विकास योजना के निर्धारित नियमों के अनुसार की गई है और भूखंडों का आवंटन भी नियमों के तहत ही हुआ है।