भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुप्रतीक्षित ‘भोपाल विकास योजना-2047’ का ड्राफ्ट सरकार ने जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी दी। लंबे अंतराल के बाद जारी किए गए इस प्रारूप में शहर की प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ आधुनिक सुविधाओं, बेहतर मोबिलिटी और आर्थिक विकास पर जोर दिया गया है। ड्राफ्ट जारी होते ही इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है।

हरित क्षेत्र 16% से बढ़ाकर 27% करने का प्रस्ताव
भोपाल विकास योजना-2047 के ड्राफ्ट में शहर के हरित क्षेत्र को बढ़ाने का प्रस्ताव है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2005 के मास्टर प्लान में करीब 16 प्रतिशत हरित क्षेत्र था, जिसे नए ड्राफ्ट में बढ़ाकर लगभग 27 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया है।
योजना में भोजताल, उसके कैचमेंट एरिया, वन क्षेत्रों, पहाड़ियों, तालाबों और बाघ भ्रमण क्षेत्रों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही शहर के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
हरित TDR का विशेष प्रावधान
ड्राफ्ट में ‘हरित TDR’ (Transferable Development Rights) का प्रावधान रखा गया है। इसके तहत हरित क्षेत्र में आने वाली निजी भूमि के स्वामियों को क्षतिपूर्ति देने और विकासकर्ताओं को TDR के जरिए अतिरिक्त विकास की सुविधा देने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
सरकार ने प्रकाशित प्रारूप पर नागरिकों, विशेषज्ञों और रहवासियों से दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जरूरत के मुताबिक संशोधन किए जा सकते हैं और इसके बाद अंतिम योजना जारी होगी।
51 किलोमीटर के ग्रोथ कॉरिडोर का प्रस्ताव
मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में करीब 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है। इसे एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (EKAI) सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक और थोक व्यापार क्षेत्रों तथा विभिन्न उपनगरों से जोड़ने का प्रस्ताव है।
ग्रोथ कॉरिडोर में मिश्रित उपयोग और उच्च घनत्व वाले विकास की योजना है। यहां स्वास्थ्य सेवाएं, आईटी, AI और डेटा सेंटर, होटल-हॉस्पिटैलिटी, शिक्षा, कॉरपोरेट ऑफिस, मॉल, हाइपरमार्केट और आवास जैसी गतिविधियों को विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
मिक्स लैंड यूज और हाई डेंसिटी डेवलपमेंट
ड्राफ्ट में TOD नीति के अनुरूप मिक्स लैंड यूज का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य आवास और कार्यस्थल के बीच बेहतर सामंजस्य के साथ सार्वजनिक परिवहन आधारित मोबिलिटी को बढ़ावा देना है।
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में मार्ग की चौड़ाई के आधार पर FAR और भवन ऊंचाई से जुड़े प्रावधानों को अधिक लचीला बनाने का प्रस्ताव है। पार्किंग के लिए मल्टीलेवल और मैकेनाइज्ड पार्किंग समेत कई विकल्पों का भी प्रावधान किया गया है।
45 लाख की अनुमानित आबादी के लिए तैयार किया गया प्लान
प्रस्तावित भोपाल विकास योजना-2047 को करीब 1,016.90 वर्ग किलोमीटर के निवेश क्षेत्र के लिए तैयार किया गया है। इसमें 254 गांव शामिल किए गए हैं और लगभग 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखा गया है। विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल करीब 61,017 हेक्टेयर बताया गया है।
ड्राफ्ट में भोपाल को महानगरीय क्षेत्र के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने और भविष्य के शहरी विस्तार को योजनाबद्ध बनाने पर भी जोर दिया गया है।
BJP बोली- कांग्रेस राजनीति छोड़कर दे बेहतर सुझाव
ड्राफ्ट जारी होने के बाद भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया ने कहा कि मास्टर प्लान को विभिन्न समीक्षाओं, न्यायालय के निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से मास्टर प्लान को लेकर आंदोलन और अनशन की बात कर रही थी। अब ड्राफ्ट सामने आ गया है, इसलिए कांग्रेस को राजनीति से अलग हटकर भोपाल के हित में रचनात्मक और बेहतर सुझाव देने चाहिए। यह भाजपा नेता का बयान है।
कांग्रेस का पलटवार- सिर्फ ड्राफ्ट से काम नहीं चलेगा
कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सिर्फ ड्राफ्ट जारी कर वाहवाही लूटना चाहती है। उनके मुताबिक ड्राफ्ट जारी करने के बजाय सरकार को इसे समयबद्ध तरीके से धरातल पर लागू करने की दिशा में काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रहवासी, व्यापारी और आम नागरिक लंबे समय से परेशान हैं। इसलिए सरकार को जमीनी स्तर पर जाकर लोगों से सीधे दावे-आपत्तियां और सुझाव लेने चाहिए। कांग्रेस की ओर से मास्टर प्लान को लेकर यह राजनीतिक प्रतिक्रिया है।
अब दावे-आपत्तियों के बाद आएगा अंतिम प्लान
भोपाल मास्टर प्लान-2047 फिलहाल ड्राफ्ट स्तर पर है। प्रकाशित प्रारूप पर नागरिकों और विशेषज्ञों से सुझाव एवं आपत्तियां ली जाएंगी। इसके बाद संबंधित विभाग आवश्यक संशोधन कर अंतिम विकास योजना जारी करेगा। इसलिए ड्राफ्ट में प्रस्तावित प्रावधानों को अभी अंतिम व्यवस्था नहीं माना जा सकता।