रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण के क्षेत्र में टाटा पावर के प्रवेश को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने रायपुर, धरसीवां, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसील क्षेत्र में टाटा पावर को वितरण लाइसेंस दिए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर की है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए इसे प्रदेश की सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।

टाटा पावर ने CSERC में दायर की है याचिका
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, टाटा पावर कंपनी लिमिटेड ने याचिका क्रमांक 89/2026 के तहत रायपुर, धरसीवां, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसील क्षेत्र के लिए वितरण लाइसेंस देने का आवेदन किया है। यह आवेदन विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 14 और 15 के तहत दाखिल किया गया है।
CSERC ने इस मामले में आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव भी आमंत्रित किए हैं। आयोग के मुताबिक, मामले की सार्वजनिक सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:30 बजे निर्धारित है।
विकास उपाध्याय ने किया विरोध
पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने टाटा पावर के इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि वे इसे जनविरोधी और छत्तीसगढ़ के हितों के खिलाफ मानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कंपनी के प्रवेश से भविष्य में सरकारी बिजली वितरण कंपनी CSPDCL पर असर पड़ सकता है।
उपाध्याय ने टाटा पावर के आवेदन में आगामी पांच वर्षों में प्रस्तावित क्षेत्र में वितरण नेटवर्क विकसित करने के लिए बताई गई करीब 435 करोड़ रुपये की निवेश राशि पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इतने बड़े क्षेत्र में नए 33 और 11 केवी सब-स्टेशन, बिजली लाइन और अन्य वितरण ढांचा तैयार करने के लिए यह राशि पर्याप्त नहीं होगी।
निजी कंपनी के आने से बिजली महंगी होने का दावा
विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि निजी कंपनी के प्रवेश के बाद भविष्य में बिजली की दरों पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी वितरण व्यवस्था कमजोर होने पर निजी कंपनियां बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती हैं और व्हीलिंग चार्ज तथा अन्य शुल्क के जरिए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है।
उन्होंने अन्य राज्यों में निजी बिजली वितरण कंपनियों के अनुभव का हवाला देते हुए दावा किया कि निजीकरण से उपभोक्ताओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है। हालांकि, इन दावों के समर्थन में उन्होंने जिन राज्यों या कंपनियों का उल्लेख किया, उनके संबंध में कोई स्वतंत्र मूल्यांकन इस बयान में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
स्मार्ट मीटर को लेकर भी सरकार पर निशाना
उपाध्याय ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है और बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने ‘पीएम सूर्य घर योजना’ को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि मुफ्त बिजली के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है।
आवेदन खारिज करने की मांग
विकास उपाध्याय ने CSERC में दाखिल याचिका क्रमांक 89/2026 को निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिजली वितरण जैसी सार्वजनिक उपयोगिता वाली व्यवस्था को निजी हाथों में देने के बजाय सरकारी संस्थाओं को मजबूत किया जाना चाहिए।
उपाध्याय ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने टाटा पावर के प्रस्ताव को आगे बढ़ाया और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में कदम उठाया, तो कांग्रेस सड़क से लेकर विधानसभा तक आंदोलन करेगी।
1 अक्टूबर को होगी सार्वजनिक सुनवाई
फिलहाल टाटा पावर को इन क्षेत्रों में वितरण लाइसेंस मिला नहीं है। मामला अभी CSERC के समक्ष विचाराधीन है और आयोग ने 1 अक्टूबर को सार्वजनिक सुनवाई तय की है। आम लोगों और संबंधित पक्षों को अपनी आपत्तियां और सुझाव देने का अवसर भी दिया गया है।
विकास उपाध्याय की ओर से दायर याचिका के माध्यम से इस प्रस्ताव का विरोध किया गया है। अब आगे की प्रक्रिया में आयोग संबंधित पक्षों की दलीलें और आपत्तियां सुनने के बाद नियमानुसार निर्णय करेगा।