November 6, 2026

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने संचार टावर लगाने वाली दिल्ली की एक कंपनी को बिना कारण बताओ नोटिस और पक्ष रखने का अवसर दिए ब्लैकलिस्ट करने के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना जरूरी है। कोर्ट ने कंपनी को 30 दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। इसके बाद संबंधित विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकेगा।

33 टावर लगाने का मिला था ठेका

याचिकाकर्ता कंपनी के प्रोपराइटर शिव कुमार शर्मा ने याचिका में बताया कि उनकी कंपनी को पुलिस विभाग के लिए 33 संचार टावर लगाने का ठेका मिला था। कंपनी के अनुसार, उसने निर्धारित समय में काम पूरा कर लिया, लेकिन विभाग ने केवल 13 टावरों का भुगतान किया।

शेष 20 टावरों का भुगतान इस आधार पर रोक दिया गया कि उनका निर्माण निविदा की शर्तों के अनुरूप नहीं हुआ था। बकाया राशि को लेकर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कार्यवाही भी लंबित है।

ब्लैकलिस्ट करने से पहले नहीं दिया गया सुनवाई का अवसर

कंपनी के मुताबिक, 26 फरवरी 2026 को जारी पत्र में उसे 15 मार्च तक कथित कमियां दूर करने के लिए कहा गया था। ऐसा नहीं करने पर सुरक्षा राशि जब्त करने और ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी गई थी।

इसके बाद 16 जून 2026 को कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। कंपनी ने अदालत में दलील दी कि अंतिम कार्रवाई से पहले उसे न तो उचित कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।

सरकार ने तकनीकी कमियों का दिया हवाला

राज्य सरकार की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि कंपनी को 20 टावरों में कमियां दूर करने का अवसर दिया गया था। विभाग ने चेतावनी भी दी थी कि निर्धारित समय में सुधार नहीं करने पर सुरक्षा राशि जब्त करने के साथ ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।

सरकार के अनुसार, कंपनी ने 12 अगस्त 2025 को लिखे पत्र में टावरों का निर्माण निर्धारित तकनीकी शर्तों के अनुरूप नहीं होने की बात स्वीकार की थी और कमियां दूर करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था।

हाईकोर्ट ने उचित अवसर देने पर दिया जोर

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी माना और ब्लैकलिस्ट करने के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कंपनी को 30 दिन में जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। जवाब मिलने के बाद संबंधित विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकेगा।

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