September 21, 2026

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2026 में सरकार के प्रमुख के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे किए हैं। उन्होंने अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और मई 2014 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद मई 2014 में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, 2001 से 2026 तक की यह यात्रा शासन, राजनीति, कल्याणकारी योजनाओं, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीक से जुड़े कई प्रमुख फैसलों के दौर से गुजरी है।

गुजरात के मुख्यमंत्री से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर

नरेंद्र मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत संगठनात्मक कार्य से की और बाद में गुजरात के मुख्यमंत्री बने। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने अक्टूबर 2001 से मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से 2025 में जारी एक वक्तव्य में मोदी ने 2001 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद की अपनी यात्रा को याद करते हुए कहा था कि उनका प्रयास लोगों के जीवन में सुधार और देश की प्रगति में योगदान देने का रहा है। उन्होंने संविधान के मूल्यों को मार्गदर्शक बताते हुए विकसित भारत के लक्ष्य के लिए आगे भी काम करने की बात कही थी।

विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर

प्रधानमंत्री के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति में विभिन्न शक्ति-केंद्रों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया गया है। रूस, अमेरिका, पश्चिम एशिया और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर भारत ने अलग-अलग मंचों पर अपने हितों को सामने रखा है।

सितंबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता भारत ने की। सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, बहुपक्षीय सहयोग और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के दौरान समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।

BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

कल्याणकारी योजनाओं पर सरकार का फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गरीब और वंचित वर्गों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की हैं। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं शामिल हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, आयुष्मान भारत का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है। सरकार ने इन योजनाओं के जरिए आवास, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरतों तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया है।

इन योजनाओं के प्रभाव और क्रियान्वयन को लेकर सरकार के दावों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में इनके परिणामों पर सार्वजनिक नीति और आर्थिक विश्लेषण भी जारी रहे हैं। इसलिए योजनाओं की उपलब्धियों को उनके आधिकारिक आंकड़ों और स्वतंत्र आकलनों के संदर्भ में देखा जाता है।

स्वच्छ भारत से जनभागीदारी तक

प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल में स्वच्छ भारत मिशन को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख अभियान के रूप में आगे बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री ने स्वयं स्वच्छता अभियान में हिस्सा लेकर नागरिकों से इसमें भागीदारी की अपील की थी।

इस अभियान का उद्देश्य खुले में शौच की समस्या को कम करना, स्वच्छता के बुनियादी ढांचे का विस्तार करना और स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ना था। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर भी स्वच्छता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा में रहा है।

अर्थव्यवस्था, डिजिटल तकनीक और आत्मनिर्भरता

मोदी सरकार के कार्यकाल में मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को आगे बढ़ाया गया। इन पहलों के जरिए विनिर्माण, डिजिटल सेवाओं, स्टार्टअप और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति अपनाई गई।

रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और निर्यात बढ़ाने पर भी सरकार ने जोर दिया है। इसी तरह डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, ऑनलाइन भुगतान और सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण को भारत की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में चंद्रयान-3 की सफलता

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में चंद्रयान-3 की सफलता एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मिशन के तहत चंद्रयान-3 ने 2023 में चंद्रमा की सतह पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। इसके साथ भारत चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाले देशों की सूची में शामिल हुआ और दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट उतरने वाला पहला देश बना।

इस उपलब्धि ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैश्विक स्तर पर व्यापक ध्यान दिलाया।

राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ नीति

मोदी सरकार के कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को प्रमुख नीतिगत मुद्दों में रखा गया। उरी आतंकी हमले के बाद 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा हमले के बाद 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक भारत की सुरक्षा नीति से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम रहे।

इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर भी आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई के रूप में सामने आया। इन सैन्य कार्रवाइयों को सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में दृढ़ता के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है।

युवाओं और महिलाओं पर फोकस

सरकार ने युवाओं के लिए कौशल विकास, स्वरोजगार, स्टार्टअप और मुद्रा जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया। इनका उद्देश्य युवाओं को रोजगार तलाशने के साथ-साथ उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना रहा है।

महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और लखपति दीदी जैसे कार्यक्रमों पर जोर दिया गया। इसके अलावा संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने से संबंधित महिला आरक्षण कानून भी मोदी सरकार के कार्यकाल के प्रमुख विधायी फैसलों में शामिल रहा।

योग और सांस्कृतिक विरासत

प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर योग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। भारत के प्रस्ताव के बाद संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र में 177 देशों का समर्थन मिला था।

अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ी गतिविधियां, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को हटाने का निर्णय और भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषय भी मोदी सरकार के प्रमुख राजनीतिक और नीतिगत मुद्दों में रहे हैं।

‘मन की बात’ से सीधा संवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए देशवासियों से नियमित संवाद की परंपरा विकसित की। कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले सामान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों, किसानों और अन्य लोगों की उपलब्धियों एवं पहलों का उल्लेख किया जाता रहा है।

यह मंच सरकार और नागरिकों के बीच संवाद के एक माध्यम के रूप में विकसित हुआ है।

25 वर्षों की यात्रा का राजनीतिक महत्व

2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरुआत से लेकर 2026 में सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे करने तक नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। इस अवधि में गुजरात के शासन से लेकर केंद्र सरकार की नीतियों तक विकास, कल्याण, राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, विदेश नीति और सांस्कृतिक मुद्दे प्रमुख रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी स्वयं अपनी इस यात्रा को सेवा और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते रहे हैं। 2025 में 25वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर उन्होंने कहा था कि देश की सेवा करना उनके लिए सर्वोच्च सम्मान है और संविधान के मूल्यों को मार्गदर्शक मानते हुए विकसित भारत के लक्ष्य के लिए काम जारी रहेगा।

25 वर्ष की इस यात्रा का आकलन राजनीतिक समर्थन और आलोचना, दोनों दृष्टिकोणों से अलग-अलग किया जाता रहा है। ऐसे में इस अवधि को समझने के लिए उनके शासनकाल के फैसलों, योजनाओं, उपलब्धियों, विवादों और विभिन्न क्षेत्रों में हुए बदलावों को उनके संदर्भ और उपलब्ध आंकड़ों के साथ देखना जरूरी है।

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