मध्य प्रदेश के जबलपुर में हिंदू युवती और ईसाई समुदाय के युवक के बीच विवाह की प्रक्रिया को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा हो गया। हिंदू धर्म सेना के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और विवाह का विरोध करते हुए उसे रुकवा दिया। संगठन ने युवती पर दबाव डालकर शादी कराने और इसके पीछे धर्मांतरण की साजिश होने का आरोप लगाया है।

सूचना मिलने पर ओमती थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया और मामले की जांच शुरू कर दी। फिलहाल संगठन की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
हिंदू युवती और ईसाई युवक के विवाह का विरोध
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जबलपुर कलेक्ट्रेट परिसर में एक हिंदू युवती और ईसाई समुदाय के युवक के विवाह की प्रक्रिया चल रही थी। इसकी जानकारी मिलने पर हिंदू धर्म सेना के कार्यकर्ता वहां पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
विरोध के दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने विवाह की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई और मामले की जांच की मांग की।
युवक पर पहचान छिपाने का आरोप
हिंदू धर्म सेना का आरोप है कि युवक ने युवती से संपर्क करते समय अपनी वास्तविक पहचान छिपाई थी। संगठन के मुताबिक, युवक ने अपना नाम ‘अंकुश’ बताया था, जबकि वह ईसाई समुदाय से संबंध रखता है।
संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी आशंका जताई कि विवाह की आड़ में धर्मांतरण कराने की कोशिश की जा रही थी। उनका दावा है कि युवती पर अनुचित दबाव डालकर शादी कराई जा रही थी।
हालांकि, ये आरोप फिलहाल संगठन की ओर से लगाए गए हैं। युवक की पहचान, युवती की सहमति और धर्मांतरण से जुड़े दावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ओमती थाना पुलिस ने संभाली स्थिति
कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामे और तनाव की सूचना मिलते ही ओमती थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर स्थिति शांत कराई। इसके बाद संबंधित लोगों को थाने ले जाकर पूछताछ शुरू की गई।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
जांच के बाद स्पष्ट होगी मामले की स्थिति
जबलपुर कलेक्ट्रेट में हुए इस घटनाक्रम के बाद अब पुलिस की जांच पर नजर है। मामले में युवती की सहमति, युवक की पहचान और संगठन की ओर से लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जाएगी।
फिलहाल किसी भी आरोप को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। पुलिस जांच पूरी होने और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।