क्या फैसला दिया गया?
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की एकल पीठ के न्यायाधीश जस्टिस बी.डी. गुरु ने फैसला दिया कि यदि किसी शासकीय कर्मचारी को निलंबित किए जाने के 90 दिनों के भीतर आरोप-पत्र (चार्जशीट) नहीं दिया जाता और निलंबन अवधि बढ़ाने का वैध आदेश भी जारी नहीं किया जाता, तो ऐसा निलंबन स्वतः समाप्त माना जाएगा।

मामला क्या था?
- कांकेर निवासी एम.के. खरे को लोक निर्माण विभाग में पदस्थापना के दौरान 9 जनवरी 2026 को निलंबित किया गया था।
- निलंबन के बाद 90 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर विभाग ने न तो आरोप-पत्र जारी किया और न ही निलंबन बढ़ाने का आदेश पारित किया।
- इसके बाद खरे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निलंबन समाप्त करने की मांग की।
याचिकाकर्ता का तर्क
याचिका में कहा गया कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के अनुसार 90 दिनों के भीतर चार्जशीट देना आवश्यक है। ऐसा न होने पर कर्मचारी सेवा में बहाली का अधिकारी हो जाता है।
कोर्ट का निर्णय
अदालत ने याचिकाकर्ता के तर्कों को स्वीकार करते हुए निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया और माना कि विभाग ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
इस फैसले का महत्व
- सरकारी विभागों को निलंबन मामलों में निर्धारित समय-सीमा का पालन करना होगा।
- केवल निलंबन आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है; 90 दिनों के भीतर आरोप-पत्र या निलंबन विस्तार का वैध आदेश आवश्यक है।
- यह निर्णय सरकारी कर्मचारियों के प्रक्रियात्मक अधिकारों की रक्षा को मजबूत करता है।
ध्यान रहे, यह निर्णय उपलब्ध विवरण के आधार पर है। किसी समान मामले में अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित नियमों, तथ्यों और उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के प्रासंगिक निर्णयों पर भी निर्भर कर सकती है।