मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने साइबर अपराधों पर जताई सख्त नाराजगी
- मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में बढ़ते साइबर अपराध और पुलिस की धीमी जांच पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि “साइबर ठग मिनटों में अपना काम कर रहे हैं, जबकि पुलिस घोंघे की चाल चल रही है।”
- कोर्ट ने साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस, तकनीकी विशेषज्ञों, बैंकों, जांच एजेंसियों और केंद्र सरकार को संयुक्त रूप से काम करने के निर्देश दिए।

मामला क्या है?
- जबलपुर की रिटायर्ड बैंक कर्मचारी चैताली मिश्रा से क्रेडिट कार्ड अपडेट करने के नाम पर ₹6.24 लाख की साइबर ठगी हुई।
- शिकायतों के बावजूद राहत नहीं मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
कोर्ट की कार्रवाई
- हाईकोर्ट ने पहले पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम के डीजीपी से जवाब मांगा था।
- सुनवाई में बताया गया कि मामले के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
- कोर्ट ने गृह मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और दूरसंचार विभाग को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।
पुलिस का पक्ष
- जबलपुर एसपी ने बताया कि शिकायत मिलते ही मामला साइबर सेल को भेज दिया गया था।
- अलग-अलग बैंकों के खातों में रकम ट्रांसफर होने और आरोपियों के विभिन्न राज्यों में होने के कारण जांच में देरी हुई।
जबलपुर में साइबर ठगी के आंकड़े
- पिछले डेढ़ साल में 4,200 से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हुए।
- कुल नुकसान लगभग ₹50 करोड़।
- 2025 में 3,400 से अधिक साइबर अपराध दर्ज हुए, जिनमें करीब ₹35 करोड़ की ठगी हुई।
- जनवरी–जुलाई 2026 के बीच 800 से अधिक मामले सामने आए, जिनमें लगभग ₹15 करोड़ का नुकसान हुआ।
कोर्ट की अपेक्षा
- हाईकोर्ट का मानना है कि अंतर-राज्यीय समन्वय, तकनीकी जांच और संबंधित संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से साइबर अपराधों पर अधिक प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।