
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। मंदिर के कपाट खुलते ही गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया।
इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। भगवान महाकाल को भांग और चंदन अर्पित कर आभूषणों और पुष्प मालाओं से दिव्य श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण से पहले हुआ विशेष पूजन
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर भगवान को हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार और ध्यान के बाद कपूर आरती हुई। इसके पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर भस्म अर्पित की गई।
भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल को रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से सजाया गया। विशेष श्रृंगार में बाबा महाकाल का स्वरूप बेहद मनोहारी नजर आया।
जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए और पुण्य लाभ अर्जित किया।
श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहीं। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठा।