खैरागढ़। करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से बन रही राजनांदगांव-खैरागढ़ सड़क की पहली डामर परत कई जगह उखड़ने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। सड़क के कुछ हिस्सों में गिट्टी बाहर दिखाई दे रही है, जबकि सतह भी ऊबड़-खाबड़ हो गई है। निर्माण कार्य में कथित अनियमितता और गुणवत्ताविहीन काम की शिकायतों के बाद लोक निर्माण विभाग ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है।

विभाग का कहना है कि पहली डामर परत बिछाए जाने के बाद तेज बारिश और पानी के कारण कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं, शिकायतकर्ताओं ने निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के पालन की जांच की मांग की है।
पहली डामर परत उखड़ने से निर्माण पर सवाल
राजनांदगांव से खैरागढ़ की ओर आने वाले मार्ग के कुछ हिस्सों में डामर उखड़ने और गिट्टी बाहर निकलने की स्थिति सामने आई है। सड़क अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई है, लेकिन शुरुआती परत की हालत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों और गुणवत्ता संबंधी प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई। सड़क की मोटाई, डामर में बिटुमिन की मात्रा, कॉम्पैक्शन और निर्माण की निगरानी जैसे पहलुओं की जांच की मांग की गई है।
हालांकि, निर्माण में भ्रष्टाचार या तकनीकी अनियमितता की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
विभाग बोला- खराब हिस्से को हटाकर दोबारा होगा डामरीकरण
खैरागढ़ की उप अभियंता स्मारिका तिवारी के मुताबिक, सड़क पर अभी दो और परतें बिछाई जानी हैं। जिन हिस्सों में पहली डामर परत क्षतिग्रस्त हुई है, वहां खराब सामग्री हटाकर दोबारा डामरीकरण किया जाएगा।
विभाग ने शुरुआती परत को नुकसान पहुंचने के पीछे तेज बारिश और पानी को वजह बताया है। अब तकनीकी जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि नुकसान केवल मौसम के कारण हुआ या निर्माण के दौरान गुणवत्ता संबंधी कमियां भी इसकी वजह रहीं।
भरत लाल वर्मा ने की थी जांच की मांग
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजनांदगांव के उपाध्यक्ष भरत लाल वर्मा ने सितंबर 2026 में राजनांदगांव-खैरागढ़ और राजनांदगांव-मोहला-मानपुर सड़क परियोजनाओं को लेकर शिकायत की थी।
शिकायत में कथित भ्रष्टाचार और गुणवत्ताविहीन निर्माण की जांच कराने की मांग की गई थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने मामले की तकनीकी जांच के लिए समिति गठित की।
चार सदस्यीय समिति करेगी तकनीकी जांच
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी ने 2 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर चार सदस्यीय जांच समिति बनाई। समिति को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच में सड़क निर्माण से जुड़े इन तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी:
- GSB और WMM की गुणवत्ता
- सबग्रेड की स्थिति
- डामर और बिटुमिन की मात्रा
- सड़क की मोटाई और घनत्व
- सामग्री का ग्रेडेशन और एग्रीगेट की गुणवत्ता
- सड़क का लेवल और सतह की स्थिति
- निर्माण में जिम्मेदार अधिकारियों और कार्य एजेंसी की भूमिका
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों के पीछे निर्माण संबंधी तकनीकी कमी है या मौसम और पानी का प्रभाव।
गड़बड़ी साबित हुई तो कार्रवाई, भुगतान रोकने पर भी विचार
विभागीय आदेश में कहा गया है कि यदि जांच के दौरान निर्माण की गुणवत्ता में समझौता, वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार प्रमाणित होता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जांच पूरी होने तक संबंधित कार्यों के भुगतान पर रोक लगाने पर विचार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके अलावा डोंगरगांव-कुमरदा सहित जिन स्थानों पर सड़क खोदकर छोड़ दी गई है, वहां सुरक्षित आवागमन के लिए तत्काल मरम्मत, चेतावनी संकेत और वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा गया है।
तीन दिन में रिपोर्ट, सड़क की गुणवत्ता पर टिकी नजर
करीब 90 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना को लेकर अब जांच समिति की रिपोर्ट अहम होगी। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि पहली डामर परत उखड़ने की वजह क्या है और निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन हुआ या नहीं।
फिलहाल विभाग की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्सों को सुधारने की बात कही गई है। वहीं, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय करने का फैसला जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगा।