क, इसी व्यवस्था के तहत खदानों से कोयला निकालने और उसके परिवहन के एवज में प्रति टन 25 रुपये की दर से कथित अवैध वसूली किए जाने का आरोप है। एजेंसियों का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए एक समानांतर नेटवर्क बनाया गया था, जिसके माध्यम से जुटाई गई रकम अधिकारियों, बिचौलियों और कथित राजनीतिक संरक्षण देने वाले लोगों तक पहुंचाई जाती थी।

500 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली का अनुमान
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के दौरान कथित कोल लेवी के जरिए करीब 500 से 540 करोड़ रुपये की अवैध राशि जुटाए जाने का अनुमान है। जांच से जुड़े दावों में प्रतिदिन 2 से 3 करोड़ रुपये की वसूली का भी उल्लेख किया गया है।
एजेंसियों का आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल बेनामी संपत्तियां खरीदने और राजनीतिक व प्रशासनिक स्तर पर वितरण सहित अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया। मामले में आरोपों की अंतिम न्यायिक स्थिति अदालत की कार्यवाही और फैसले से तय होगी।
आज की सुनवाई पर नजर
ACB-EOW की ओर से 9 आरोपियों को समन जारी किए जाने के बाद आज की सुनवाई पर नजर है। प्रकरण में अंतिम चालान पेश किए जाने की संभावना है। अदालत में आगे क्या कार्यवाही होती है, इससे मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया की दिशा स्पष्ट होगी।