उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के दौरान शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने को लेकर हुए विवाद पर अखिल भारतीय साधु संत सन्यासी परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष महंत अनिलानंद महाराज का बयान सामने आया है। उन्होंने घटना की निंदा करते हुए इसे उज्जैन को ‘तालिबान’ बनाने का प्रयास बताया और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।

“सड़क सार्वजनिक संपत्ति है, किसी व्यक्ति विशेष की नहीं”
महंत अनिलानंद महाराज ने कहा कि सड़क सार्वजनिक उपयोग के लिए होती है और उस पर किसी एक व्यक्ति या समुदाय का अधिकार नहीं है। विकास कार्यों में सभी पक्षों को सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए हिंदू समाज के लोगों ने कई मंदिरों को हटाने की सहमति दी, तो दूसरे समुदाय के कुछ लोगों को इस प्रक्रिया पर आपत्ति क्यों है? उन्होंने कहा कि उग्र और हिंसक विरोध से उन लोगों का भी मनोबल प्रभावित होता है, जो सामाजिक सौहार्द और कानून का पालन करने में विश्वास रखते हैं।
“नेताओं ने भी सार्वजनिक हित में हटाए अपने निर्माण”
महंत अनिलानंद महाराज ने कहा कि कई बड़े राजनेताओं ने भी सार्वजनिक हित और सड़क चौड़ीकरण के लिए अपने निर्माण स्वयं हटाए हैं। ऐसे में विकास कार्यों और कानून के तहत चल रही प्रक्रिया का विरोध करना उचित नहीं है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
अखिल भारतीय साधु संत सन्यासी परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष ने प्रशासन से विवाद के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रशासन को उनके शब्दों में, ‘तालिबानी सोच’ रखने वाली ताकतों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।
महंत अनिलानंद महाराज ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन किसी पक्ष के दबाव में आता है या दोहरा रवैया अपनाता है, तो भविष्य में हिंदू समाज भी अपने धार्मिक स्थलों को हटाने पर सहमति नहीं देगा।
सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण बना विवाद का केंद्र
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी प्रक्रिया में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के दौरान विरोध, पथराव और पुलिस कार्रवाई की घटना सामने आई थी। अब इस मामले पर धार्मिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
महंत अनिलानंद महाराज के बयान में प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई और विकास कार्यों में सहयोग की मांग प्रमुख रही।