बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में च्वाइस सेंटर और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालकों के क्यूआर कोड का दुरुपयोग कर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का रेंज साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में रायपुर निवासी अंकित आहूजा और आशीष केवलानी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने बिलासपुर सहित प्रदेश के नौ जिलों में करीब 45 च्वाइस एवं सीएससी सेंटर संचालकों को निशाना बनाया। अब तक सामने आए मामलों में ठगी की अनुमानित रकम 20 से 25 लाख रुपये बताई जा रही है।

आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 2 हजार रुपये नकद, वारदात में इस्तेमाल एक कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। पुलिस मामले में अन्य पीड़ितों और ठगी की वास्तविक रकम का पता लगाने में जुटी है।
लक्ष्मी च्वाइस सेंटर के संचालक की शिकायत से खुला मामला
मामले की शुरुआत बिलासपुर जिले के बिल्हा मोड़ स्थित लक्ष्मी च्वाइस सेंटर के संचालक देवेंद्र रजक की शिकायत से हुई। हिर्री थाना क्षेत्र के ग्राम खरकेना निवासी देवेंद्र रजक ने पुलिस को बताया कि 5 अक्टूबर को दोपहर के समय एक व्यक्ति उनके सेंटर पहुंचा।
उसने संचालक से कहा कि वह सेंटर पर लगे क्यूआर कोड के माध्यम से उनके खाते में रकम जमा करवाएगा और बदले में उतनी ही राशि नकद ले लेगा। संचालक के सहमत होने पर आरोपी ने क्यूआर कोड की तस्वीर अपने मोबाइल में खींची और किसी अन्य व्यक्ति को भेज दी।
इसके बाद खाते में 16 हजार रुपये जमा हुए तो संचालक ने आरोपी को उतनी ही रकम नकद दे दी। अगले दिन बैंक खाते पर होल्ड लगने के बाद देवेंद्र रजक स्टेट बैंक की चकरभाठा शाखा पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि साइबर फ्रॉड से संबंधित रकम खाते में आने के कारण उसे होल्ड किया गया है।
बाद में च्वाइस सेंटर संचालकों के व्हाट्सऐप ग्रुप से उन्हें जानकारी मिली कि इसी तरीके से अन्य संचालकों के साथ भी धोखाधड़ी हुई है।
ऐसे करते थे QR कोड का दुरुपयोग
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के दोनों आरोपियों की भूमिका अलग-अलग थी। अंकित आहूजा विभिन्न च्वाइस और सीएससी सेंटरों में जाता था। वह वहां लगे क्यूआर कोड की तस्वीर खींचकर अपने साथी आशीष केवलानी के मोबाइल पर भेज देता था।
इसके बाद आशीष उस क्यूआर कोड को स्कैन कर सेंटर संचालक के खाते में रकम ट्रांसफर करता था। खाते में पैसा जमा होने पर अंकित संचालक से उतनी ही राशि नकद लेकर वहां से निकल जाता था।
बाद में जब साइबर ठगी से जुड़ी रकम खातों में आने के कारण बैंक खातों पर होल्ड लगने लगा, तब संचालकों को धोखाधड़ी की आशंका हुई। पुलिस का कहना है कि आरोपी रायपुर से निकलकर अलग-अलग जिलों में जाते और इसी तरीके से वारदात को अंजाम देते थे।
दोबारा वारदात की कोशिश के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपी
शिकायत के आधार पर रेंज साइबर थाना बिलासपुर में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 317(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी बिलासपुर के हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में दोबारा वारदात करने की कोशिश में सक्रिय हैं। संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पुलिस टीम ने अंकित आहूजा को पकड़कर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में उसने आशीष केवलानी के साथ मिलकर ठगी करने की बात स्वीकार की। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया।
नौ जिलों में करीब 45 सेंटर संचालकों को बनाया निशाना
पुलिस के अनुसार, अब तक करीब 45 पीड़ित च्वाइस एवं सीएससी सेंटर संचालकों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। सामने आए मामलों में इन नौ जिलों के संचालकों को निशाना बनाए जाने की जानकारी मिली है:
- बिलासपुर
- रायपुर
- महासमुंद
- बलौदाबाजार
- कोरबा
- जांजगीर-चांपा
- रायगढ़
- सक्ती
- दुर्ग
पुलिस ने इन मामलों में ठगी की कुल रकम लगभग 20 से 25 लाख रुपये होने का अनुमान जताया है। हालांकि, पीड़ितों की संख्या और वास्तविक आर्थिक नुकसान की पुष्टि के लिए जांच जारी है।
एएसपी पंकज पटेल ने दी जांच की जानकारी
एएसपी पंकज पटेल ने बताया कि पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य ठगी के सभी पीड़ितों की पहचान करना, वास्तविक नुकसान का आकलन करना और गिरोह से जुड़ी अन्य संभावित कड़ियों का पता लगाना है।