भोपाल। मध्य प्रदेश में दतिया उपचुनाव में जीत के बाद कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी अब पहली बार अपनी सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मामलों की समिति का विकेंद्रीकरण करने जा रही है। प्रदेश स्तर की तर्ज पर अब हर जिले में जिला स्तरीय राजनीतिक मामलों की समिति गठित की जाएगी।

जिले के प्रभारी होंगे समिति के अध्यक्ष
जिला स्तरीय समिति का मुख्य काम स्थानीय समस्याओं और राजनीतिक मुद्दों की पहचान करना होगा। समिति तय करेगी कि किसी मुद्दे को कब, किस तरह और किस स्तर पर उठाया जाए। इसके साथ ही नगर निगम, नगर पालिका, जनपद और पंचायत से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों में टिकट चयन प्रक्रिया में भी समिति की अहम भूमिका होगी।
समिति की अध्यक्षता जिले के प्रभारी करेंगे। हर तीन महीने में समिति की बैठक आयोजित करना अनिवार्य होगा और इसकी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजी जाएगी। इसके बाद राज्य स्तरीय राजनीतिक मामलों की समिति इस रिपोर्ट पर विचार करेगी।
समिति में कौन-कौन होंगे शामिल?
नई व्यवस्था के तहत जिला समिति में जिले के वर्तमान और पूर्व विधायक, सांसद, पूर्व सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष, महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और कांग्रेस के विभिन्न फ्रंटल संगठनों के जिला अध्यक्ष शामिल होंगे।
इससे स्थानीय नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों को जिला स्तर पर राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी मिलने की उम्मीद है।
अब भोपाल नहीं, जिले में तय होंगे स्थानीय मुद्दे
कांग्रेस के मुताबिक अभी तक ज्यादातर नीतिगत फैसले भोपाल स्थित प्रदेश स्तरीय राजनीतिक मामलों की समिति के स्तर पर लिए जाते थे। जिला स्तर की समस्याएं भी प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचती थीं, जिससे स्थानीय मुद्दों पर तत्काल निर्णय लेने में देरी होती थी।
नई व्यवस्था के जरिए कांग्रेस अब स्थानीय मुद्दों पर स्थानीय स्तर पर ही निर्णय लेने की कोशिश करेगी। पार्टी का मानना है कि इससे कार्यकर्ताओं की भूमिका बढ़ेगी और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी।
संगठन सृजन अभियान का हिस्सा
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विक्रम चौधरी ने इसे पार्टी के संगठन सृजन अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके मुताबिक नई व्यवस्था में कार्यकर्ताओं को अधिक महत्व दिया जाएगा और दूसरी पंक्ति के नेताओं को आगे बढ़ाने का प्रयास होगा।
उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर मुद्दे तय करने और चुनावी भागीदारी में जिला समिति की भूमिका बढ़ने से संगठन को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को बार-बार भोपाल के चक्कर लगाने की जरूरत भी कम होगी।
BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस की इस कवायद पर भाजपा ने भी निशाना साधा है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कांग्रेस के संगठनात्मक बदलाव को लेकर तंज कसते हुए कहा कि जनाधार खो रही कांग्रेस इस तरह के प्रयोग कर रही है।
उन्होंने पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में कांग्रेस संगठन कमजोर हुआ। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की कवायद से कांग्रेस को कोई खास राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला।
अब देखना होगा कि जिला स्तरीय राजनीतिक मामलों की समितियों का यह नया फॉर्मूला मध्य प्रदेश में कांग्रेस के संगठन और चुनावी रणनीति को कितनी मजबूती देता है।