
इन छुट्टियों के बीच ही शिक्षकों को अलग-अलग विभागीय कामों में लगाया जा रहा है, जिससे उनका अवकाश लगभग खत्म हो गया है। आनंद विभाग ने मई में ही ट्रेनिंग तय कर दी है, वहीं समर कैंप और जनगणना जैसे कामों में भी अनिवार्य उपस्थिति रखी गई है। आनंद विभाग की ओर से जिलेवार ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं।

यही नहीं चयनित शिक्षकों को तय तारीखों पर शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी स्कूलों में समर कैंप का संचालन भी शिक्षकों के जिम्मे है। जिससे छुट्टी के दौरान भी उनकी नियमित ड्यूटी बनी हुई है। कई शिक्षकों को जनगणना कार्य में भी लगाया गया है। शिक्षकों का कहना है कि पूरे साल के शैक्षणिक दबाव के बाद मई ही एकमात्र अवकाश होता है, लेकिन इस बार अलग-अलग जिम्मेदारियों के कारण उन्हें कोई राहत नहीं मिल रही। शिक्षक संगठनों ने भी इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।