November 6, 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव का इंतजार नौ साल से जारी है। वर्ष 2017 में आखिरी बार छात्रसंघ चुनाव हुए थे। इसके बाद कैंपस में चुनावी प्रक्रिया दोबारा शुरू नहीं हो सकी। अब 2026 में छात्र राजनीति की वापसी की उम्मीद जगी है, लेकिन सितंबर बीतने के करीब है और चुनाव का कार्यक्रम अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है।

सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर का हवाला देते हुए सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने का प्रावधान बताया था। इसके बाद छात्रों और छात्र संगठनों में उम्मीद बढ़ी, लेकिन चुनाव की तारीख और प्रक्रिया को लेकर अब भी स्थिति साफ नहीं है।

हाईकोर्ट में सितंबर में चुनाव कराने की बात, लेकिन कार्यक्रम का इंतजार

अगस्त में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर में सितंबर में छात्रसंघ चुनाव कराने का प्रावधान होने की जानकारी दी थी। इसके बाद माना जा रहा था कि लंबे अंतराल के बाद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में चुनाव हो सकते हैं।

हालांकि, सितंबर का बड़ा हिस्सा बीतने के बावजूद चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम सामने नहीं आया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि चुनाव प्रक्रिया कब शुरू होगी और क्या छात्रों को इस बार अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिल पाएगा।

आने वाले महीनों में त्योहारों और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के बीच चुनाव कराना भी एक चुनौती हो सकता है। फिलहाल छात्रसंघ चुनाव की तारीख को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

2017 में हुए थे आखिरी चुनाव, नौ साल से इंतजार

मध्य प्रदेश में छात्रसंघ चुनावों का इतिहास कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वर्ष 2017 में प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आखिरी बार चुनाव हुए थे। इसके बाद नियमित रूप से चुनाव नहीं हो सके।

यदि 2026 में चुनाव होते हैं, तो करीब नौ साल बाद कैंपस में निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों की वापसी होगी। इस लंबे अंतराल के कारण नई पीढ़ी के कई विद्यार्थियों को अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय में प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं मिला है।

छात्रसंघ चुनाव क्यों हैं जरूरी?

छात्रसंघ चुनाव केवल पद हासिल करने या राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं। इनका सीधा संबंध छात्रों के प्रतिनिधित्व और उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने से है।

निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि कई अहम मुद्दों को कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने उठा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • फीस और उससे जुड़ी समस्याएं
  • परीक्षा और रिजल्ट में देरी
  • हॉस्टल की सुविधाएं
  • लाइब्रेरी और अन्य शैक्षणिक संसाधन
  • कैंपस की सुरक्षा
  • विद्यार्थियों से जुड़ी दूसरी बुनियादी सुविधाएं

इसके अलावा, छात्रसंघ चुनाव युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी देते हैं।

ABVP और NSUI ने जल्द चुनाव कराने की मांग की

प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव कराने को लेकर दोनों प्रमुख छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) जल्द चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।

छात्र संगठनों का जोर इस बात पर है कि विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलना चाहिए। चुनाव में देरी के कारण छात्र प्रतिनिधित्व और कैंपस की समस्याओं को संगठित तरीके से उठाने को लेकर सवाल बने हुए हैं।

कुणाल चौधरी ने भाजपा पर साधा निशाना

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने छात्रसंघ चुनाव में देरी को भाजपा के कथित डर से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल चुनाव कराने से बच रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए।

वहीं, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के परिणामों का हवाला दिया। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि देश की युवा पीढ़ी भाजपा के साथ है।

दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है, जबकि छात्रसंघ चुनाव की तारीख और प्रक्रिया को लेकर अब तक स्पष्टता नहीं है।

क्या इस बार कैंपस में लौटेगी छात्र राजनीति?

मध्य प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव को लेकर उम्मीदें बढ़ी थीं, लेकिन अब तक कार्यक्रम घोषित नहीं होने से विद्यार्थियों का इंतजार जारी है। सरकार की ओर से हाईकोर्ट में सितंबर में चुनाव कराने का प्रावधान बताए जाने के बाद भी प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई नहीं दे रही है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार चुनाव की तारीख और कार्यक्रम कब घोषित करती है। यदि चुनाव होते हैं, तो करीब नौ साल बाद प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति को फिर से चुनावी मंच मिल सकता है।

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