November 5, 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। भोपाल के नीलम पार्क में धरने का पांचवां दिन है। प्रदेश के अलग-अलग संभागों से शिक्षक चरणबद्ध तरीके से आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। गुरुवार को शहडोल संभाग के शिक्षक भी प्रदर्शन में शामिल होने नीलम पार्क पहुंचे। वहीं, आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार से ब्लॉक स्तर पर उपवास शुरू करने की तैयारी है।

यह आंदोलन अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में तीन प्रमुख मांगों को लेकर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों की मांग है कि सरकार उनसे संवाद करे और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले। शिक्षकों का आरोप है कि टीईटी से जुड़े मामले में सरकार ने अदालत के सामने प्रभावी ढंग से अपना पक्ष नहीं रखा।

अलग-अलग संभागों के शिक्षक आंदोलन में शामिल

टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शुरू हुए धरने में प्रदेश के विभिन्न संभागों के शिक्षक शामिल हो रहे हैं। जबलपुर और ग्वालियर संभाग के शिक्षक शुरुआती तीन दिनों में प्रदर्शन में पहुंचे थे। चौथे दिन उज्जैन संभाग के शिक्षकों ने भोपाल पहुंचकर आंदोलन में भाग लिया।

अब पांचवें दिन शहडोल संभाग के शिक्षक भी नीलम पार्क में धरने में शामिल हुए हैं। आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। इसके साथ ही शुक्रवार से ब्लॉक स्तर पर उपवास शुरू करने की तैयारी है।

शिक्षकों की तीन प्रमुख मांगें

अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें टीईटी की अनिवार्यता से राहत, सेवा अवधि की गणना और ई-अटेंडेंस व्यवस्था को स्वैच्छिक बनाने की मांग शामिल है।

1. लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को टीईटी से छूट

शिक्षकों की मांग है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। इसके लिए वे विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करने और उसे केंद्र सरकार को भेजने की मांग कर रहे हैं।

2. प्रथम नियुक्ति की तारीख से सेवा गणना

शिक्षकों की दूसरी मांग है कि उनकी सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति की तारीख से की जाए। इसी आधार पर वरिष्ठता निर्धारित करने की मांग उठाई गई है।

3. ई-अटेंडेंस व्यवस्था स्वैच्छिक हो

शिक्षकों की तीसरी मांग ई-अटेंडेंस व्यवस्था को स्वैच्छिक बनाने की है। उनका कहना है कि शिक्षकों को अध्यापन के साथ विभागीय और अन्य शासकीय दायित्व भी निभाने पड़ते हैं। ऐसे में उनकी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए ई-अटेंडेंस व्यवस्था में लचीलापन दिया जाना चाहिए।

सरकार से संवाद और समाधान की मांग

धरने पर बैठे शिक्षकों का कहना है कि सरकार को उनकी मांगों पर बातचीत करनी चाहिए और समस्याओं का समाधान निकालने के लिए पहल करनी चाहिए। फिलहाल नीलम पार्क में आंदोलन जारी है और प्रदेश के विभिन्न संभागों से शिक्षकों की भागीदारी के साथ प्रदर्शन को आगे बढ़ाया जा रहा है।

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