November 4, 2026

अनूपपुर। मध्य प्रदेश के शहडोल संभाग के अनूपपुर जिले में निर्वाचन सामग्री की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बने EVM वेयरहाउस से 24 ईवीएम मशीनें गायब मिलने का मामला सामने आया है। इनमें 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट शामिल बताई जा रही हैं। मामला सामने आने के बाद अनूपपुर कोतवाली पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मशीनें कब और किन परिस्थितियों में गायब हुईं, इसका पता लगाया जा रहा है। फिलहाल ईवीएम से छेड़छाड़ या चुनाव परिणाम प्रभावित होने की कोई पुष्टि सामने नहीं आई है।

20 अगस्त को खुले में पड़ी मशीनों की दी गई थी सूचना

जानकारी के मुताबिक, 20 अगस्त को एक ठेकेदार ने पुराने तहसील कार्यालय परिसर में खुले में पड़ी ईवीएम मशीनों के बारे में तत्कालीन एसडीएम को सूचना दी थी। बताया जा रहा है कि एसडीएम मौके पर पहुंची थीं। हालांकि, इसके बाद मशीनों को तत्काल सुरक्षित किए जाने और उनकी निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

इस घटनाक्रम की पूरी जानकारी और उस समय मशीनों की स्थिति की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

वेयरहाउस की पिछली दीवार टूटी होने की बात आई सामने

मामले में वेयरहाउस की पिछली दीवार टूटी होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि मशीनों को बाहर ले जाने के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मशीनें कब, कैसे और किसकी मौजूदगी में गायब हुईं।

वेयरहाउस की सुरक्षा व्यवस्था, परिसर में आने-जाने वाले लोगों और मशीनों के रखरखाव से जुड़े रिकॉर्ड की जांच इस मामले में अहम मानी जा रही है।

21 सितंबर को शिफ्टिंग, सत्यापन में मिलीं 24 मशीनें कम

बताया जा रहा है कि 21 सितंबर को ईवीएम मशीनों को पुराने परिसर से नए तहसील कार्यालय में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद 24 से 28 सितंबर के बीच हुए सत्यापन के दौरान 24 मशीनें कम पाई गईं।

इस समयरेखा के आधार पर अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मशीनें आखिरी बार कब और कहां दर्ज थीं। साथ ही, पुराने परिसर में मशीनों की सुरक्षा और स्टॉक के मिलान की प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है।

पुलिस खंगाल रही सीरियल नंबर और स्टॉक रजिस्टर

मामले की जांच कर रही अनूपपुर कोतवाली पुलिस मशीनों के सीरियल नंबर, स्टॉक रजिस्टर और वेयरहाउस से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि रिकॉर्ड में मशीनों की अंतिम स्थिति क्या दर्ज थी और उनके गायब होने की जानकारी सत्यापन के दौरान ही क्यों सामने आई।

जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मशीनें किन परिस्थितियों में गायब हुईं और सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं।

EVM सुरक्षा पर सवाल, लेकिन छेड़छाड़ की पुष्टि नहीं

24 ईवीएम मशीनों के गायब मिलने का मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि निर्वाचन सामग्री की सुरक्षा और उसका सटीक रिकॉर्ड बनाए रखना महत्वपूर्ण है। पहले मशीनों के खुले में पड़े होने की सूचना, वेयरहाउस की पिछली दीवार टूटे होने की बात और बाद में सत्यापन में मशीनों की कमी सामने आने से कई सवाल उठे हैं।

हालांकि, जांच पूरी होने से पहले इस मामले को ईवीएम घोटाला कहना उचित नहीं होगा। फिलहाल मशीनों से छेड़छाड़ या चुनाव परिणाम प्रभावित करने से जुड़ा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 24 मशीनें कहां गईं, उनकी निगरानी की जिम्मेदारी किसके पास थी और उनकी कमी का पता समय रहते क्यों नहीं चल सका। पुलिस जांच और प्रशासनिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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