September 14, 2026

इंदौर। नगर निगम की राजस्व वसूली व्यवस्था के सामने चेक बाउंस का बढ़ता मामला अब बड़ी वित्तीय चुनौती बन गया है। करीब सवा साल में 3266 चेक बाउंस होने की जानकारी सामने आई है। इन चेकों की कुल राशि करीब 37 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इनमें बेहद छोटी रकम के चेक भी शामिल हैं। कुछ मामलों में तो महज 15 रुपये के चेक तक बाउंस हुए हैं।

लगातार बढ़ते चेक बाउंस के मामलों को देखते हुए नगर निगम ने अब बड़ा फैसला लिया है। निगम एक लाख रुपये से कम राशि के चेक स्वीकार नहीं करेगा। छोटी रकम के भुगतान के लिए ऑनलाइन पेमेंट, UPI, नकद और डिमांड ड्राफ्ट जैसे विकल्पों को बढ़ावा दिया जाएगा।

3266 चेक बाउंस, 37 करोड़ रुपये की राशि

नगर निगम में विभिन्न करों और दूसरी देनदारियों के भुगतान के लिए जमा किए जाने वाले चेक लगातार बाउंस हो रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, करीब सवा साल में 3266 चेक बाउंस हुए, जिनकी कुल राशि लगभग 37 करोड़ रुपये है।

चालू वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से 30 जून के बीच ही करीब 6.50 करोड़ रुपये के 566 चेक बाउंस होने की जानकारी सामने आई है। वहीं पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 31 करोड़ रुपये के 2700 चेक बाउंस हुए थे।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि चेक बाउंस की समस्या कुछ मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि निगम की राजस्व वसूली व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।

15 रुपये का चेक भी हुआ बाउंस

चेक बाउंस के मामलों में सबसे हैरान करने वाली बात चेक की राशि है। निगम के पास कुछ ऐसे चेक भी आए, जिनकी रकम महज 15 रुपये थी और वे भी बैंक से बाउंस होकर लौट गए।

ऐसे मामलों में छोटी राशि की वसूली के लिए बैंक प्रक्रिया, चेक रिटर्न, संबंधित व्यक्ति से संपर्क और आगे की कार्रवाई में निगम के कर्मचारियों का समय और संसाधन खर्च होता है। इसी समस्या को देखते हुए निगम ने कम राशि के चेक स्वीकार करने से दूरी बनाने का निर्णय लिया है।

अब 1 लाख से कम के चेक की ‘नो एंट्री’

नगर निगम के नए फैसले के मुताबिक अब एक लाख रुपये से कम राशि के चेक स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हालांकि छोटी रकम के भुगतान के लिए नागरिकों को ऑनलाइन भुगतान, UPI, नकद और डिमांड ड्राफ्ट जैसे विकल्प उपलब्ध रहेंगे।

निगम का तर्क है कि इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक सरल और सुरक्षित होगी तथा चेक बाउंस होने के बाद दोबारा वसूली की परेशानी से भी बचा जा सकेगा।

250 मामले अब भी लंबित

चेक बाउंस होने के बाद रकम की वसूली करना निगम के लिए दूसरी बड़ी चुनौती है। जानकारी के अनुसार करीब 250 मामले अभी लंबित हैं। इनमें चेक बाउंस होने के बावजूद संबंधित लोगों ने अब तक राशि जमा नहीं की है।

कई मामलों में रिमाइंडर दिए जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में निगम को इन लंबित रकम की वसूली के लिए अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने फैसले पर उठाए सवाल

एक लाख रुपये से कम के चेक स्वीकार नहीं करने के नगर निगम के फैसले का राजनीतिक विरोध भी शुरू हो गया है। नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए इसे मनमाना आदेश बताया है।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों की मनमानी पर लगाम लगाना जरूरी है, लेकिन निर्वाचित परिषद के रहते अधिकारी अपने स्तर पर इतना बड़ा फैसला कैसे ले सकते हैं। नेता प्रतिपक्ष ने इस संबंध में निगम आयुक्त को पत्र लिखकर फैसले पर आपत्ति जताई है और निर्णय की समीक्षा की मांग की है।

अब देखना होगा कि चेक बाउंस की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए निगम का यह फैसला राजस्व वसूली को कितना प्रभावी बनाता है और विपक्ष की आपत्ति के बाद इस पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

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