
- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम कानून के तहत हिबा (Hiba) केवल पंजीकृत गिफ्ट डीड से वैध नहीं हो जाता।
- वैध हिबा के लिए तीन आवश्यक तत्व हैं:
- दानकर्ता की स्पष्ट घोषणा,
- प्राप्तकर्ता की स्वीकृति, और
- संपत्ति के कब्जे की वास्तविक और प्रभावी सुपुर्दगी।
- केवल गिफ्ट डीड में कब्जा सौंपने का उल्लेख पर्याप्त नहीं है, यदि वास्तविक परिस्थितियों से कब्जे का हस्तांतरण साबित न हो।
- मामले में संपत्ति के लगभग 370 वर्गफुट हिस्से पर बहू और उसके बच्चों का लगातार कब्जा पाया गया। प्रतिवादी यह साबित नहीं कर सके कि पूरी संपत्ति का वास्तविक कब्जा उपहार प्राप्तकर्ताओं को सौंपा गया था।
- अदालत ने यह भी ‘मुशा’ (Mushā) के सिद्धांत पर विचार किया, क्योंकि गिफ्ट डीड चार लोगों के पक्ष में संयुक्त रूप से थी और उनके हिस्से स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं थे। हालांकि कोर्ट ने कहा कि मुशा का सिद्धांत हर मामले में यांत्रिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
- हाई कोर्ट ने रायपुर के 11वें जिला न्यायाधीश के 24 नवंबर 2025 के फैसले और 27 नवंबर 2025 की डिक्री में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और प्रथम अपील खारिज कर दी।
- परिणामतः विवादित गिफ्ट डीड को वादी पक्ष के विरुद्ध शून्य और बाध्यकारी नहीं मानने तथा उनके कब्जे में हस्तक्षेप रोकने का निचली अदालत का आदेश बरकरार रहा।
मुख्य कानूनी सिद्धांत: मुस्लिम कानून में हिबा की वैधता के लिए declaration + acceptance + delivery of possession तीनों का पूरा होना आवश्यक है; पंजीकरण अपने-आप इन आवश्यकताओं की जगह नहीं लेता।