कैलाश विजयवर्गीय के प्रशासनिक तंत्र में संघ से जुड़ाव को लेकर दिए गए बयान के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

मुख्य घटनाक्रम:
- जीतू पटवारी ने बयान को गंभीर संवैधानिक मुद्दा बताते हुए कहा कि यदि अधिकारी स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़कर प्रस्तुत कर रहे हैं, तो यह प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल है।
- उन्होंने राष्ट्रपति और राज्यपाल से इस बयान का संज्ञान लेने की मांग भी की और इसे संवैधानिक तटस्थता से जुड़ा विषय बताया।
- पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने विजयवर्गीय के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि प्रशासन में RSS का प्रभाव बढ़ा है।
- उन्होंने प्रशासन पर पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए।
- वहीं भाजपा नेता हितेश बाजपेयी ने बयान का बचाव करते हुए कहा कि लंबे समय तक एक विचारधारा वाली सरकार रहने पर अवसरवादी लोग भी सिस्टम में आ जाते हैं, और यही विजयवर्गीय के बयान का आशय था।
निष्कर्ष:
यह मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल चुका है, जहां कांग्रेस प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा इसे संगठन और शासन व्यवस्था के भीतर “अवसरवादियों” की मौजूदगी से जोड़कर समझा रही है।