गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में जल-जंगल-जमीन बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में महापंचायत का आयोजन किया गया। कोकड़ी गांव में आयोजित इस महा ग्रामसभा में गरियाबंद और धमतरी जिले के उदंती-सीतानदी अभयारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 128 गांवों के लोग शामिल हुए। ग्रामीणों ने विस्थापन का खुलकर विरोध करते हुए अपनी मांगों के समाधान के लिए शासन को 60 दिन का समय दिया है।

जबरन विस्थापन और विकास की कमी पर नाराजगी
महापंचायत में बिन्द्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव, सिहावा विधायक अंबिका मरकाम सहित समाज के कई निर्वाचित जनप्रतिनिधि और सामाजिक पदाधिकारी मौजूद रहे। सभा में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विस्थापन नीति की समुचित जानकारी दिए बिना उन्हें जबरन विस्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने अभयारण्य क्षेत्र के गांवों में अपेक्षित विकास नहीं होने पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों की कमी के बीच विस्थापन का दबाव उनकी समस्याओं को और बढ़ा सकता है। इसके साथ ही शाम के समय आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी विरोध किया गया।
60 दिन में समाधान का प्रस्ताव पारित
महाग्रामसभा में विस्थापन, विकास और आवाजाही से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके बाद प्रस्ताव पारित कर शासन से 60 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान करने की मांग की गई।
सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि पारित प्रस्ताव को संसद, विधानसभा और जिला पंचायत के पटल पर रखा जाएगा, ताकि मांगों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
मांगें नहीं मानीं तो व्यापक आंदोलन की चेतावनी
महापंचायत में चेतावनी दी गई कि यदि निर्धारित समयसीमा में समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो ग्रामीण इसे अनुसूचित क्षेत्र में पेसा (PESA) कानून के उल्लंघन के रूप में उठाएंगे। इसके बाद आने वाले दिनों में व्यापक विरोध प्रदर्शन करने की बात कही गई।
महापंचायत के जरिए ग्रामीणों ने जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों, विस्थापन नीति तथा अभयारण्य क्षेत्र में विकास की मांगों को एकजुट होकर शासन के सामने रखने का संदेश दिया।