June 17, 2026

जिंदल स्टील को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, ₹153.55 करोड़ की वसूली पर रोक

Jindal Steel Limited को एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत देते हुए High Court of Chhattisgarh की डिवीजन बेंच ने 153.55 करोड़ रुपये के रिकवरी नोटिस पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि किसी भी पक्ष को सुने बिना उस पर वित्तीय दायित्व नहीं थोपा जा सकता और सुनवाई का अवसर न देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

मामले की सुनवाई Ramesh Sinha और B. D. Guru की खंडपीठ ने की।

मामला क्या है?

विवाद वित्तीय वर्ष 2011-12 और 2012-13 में बिजली आपूर्ति से जुड़ा है। जिंदल स्टील ने पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) के तहत बिजली आपूर्ति की थी और उस समय निर्धारित दरों पर भुगतान भी प्राप्त कर लिया था।

बाद में वर्ष 2014 में टैरिफ निर्धारण और ट्रू-अप प्रक्रिया के दौरान Chhattisgarh State Electricity Regulatory Commission ने उक्त बिजली को “नॉन-फर्म पावर” मानते हुए दर घटाकर 1.50 रुपये प्रति यूनिट कर दी। इसके आधार पर Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited ने जिंदल स्टील को 153.55 करोड़ रुपये लौटाने का नोटिस जारी किया और कंपनी का ओपन एक्सेस एनओसी भी रोक दिया।

जिंदल स्टील का पक्ष

कंपनी ने अदालत में तर्क दिया कि:

  • टैरिफ निर्धारण प्रक्रिया और बाद की अपीलीय कार्यवाही में उसे पक्षकार नहीं बनाया गया।
  • बिना सुनवाई के इतनी बड़ी वित्तीय देनदारी थोपना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है।
  • जिस निर्णय का सीधा आर्थिक प्रभाव किसी इकाई पर पड़ता हो, उसमें उसे सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

खंडपीठ ने माना कि:

  • जब किसी निर्णय का प्रत्यक्ष वित्तीय प्रभाव किसी विशेष संस्था पर पड़ता है, तब प्रक्रिया अर्ध-न्यायिक (Quasi-Judicial) स्वरूप ग्रहण कर लेती है।
  • ऐसे मामलों में संबंधित पक्ष को व्यक्तिगत सुनवाई देना अनिवार्य है।
  • कैप्टिव पावर प्लांट से होने वाली बिजली आपूर्ति में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है और इसे स्वतः अनुबंध उल्लंघन नहीं माना जा सकता।

कोर्ट का आदेश

अदालत ने:

  • 7 जुलाई 2016 के रिकवरी नोटिस को रद्द कर दिया।
  • ओपन एक्सेस रोकने से जुड़े पत्रों को भी निरस्त कर दिया।
  • पूर्व में पारित सिंगल बेंच के आदेश को रद्द कर दिया।
  • Chhattisgarh State Electricity Regulatory Commission को दो माह के भीतर जिंदल स्टील को सुनवाई का अवसर देकर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया।

साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक आयोग नया निर्णय नहीं लेता, तब तक जिंदल स्टील के खिलाफ किसी प्रकार की वसूली या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

फैसले का महत्व

यह फैसला प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों को मजबूत करता है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि किसी भी नियामक या प्रशासनिक निर्णय से यदि किसी संस्था पर बड़ा वित्तीय प्रभाव पड़ता है, तो उसे सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। इससे भविष्य में टैरिफ, बिजली नियमन और औद्योगिक विवादों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल स्थापित हो सकती है।

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