छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन तिहार के तहत नगर पंचायत जरहागांव में आयोजित शिविर में तीन प्रमुख शिकायतें सामने आईं, जिनसे स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठे हैं।
- ग्राम पंचायत सचिव के समायोजन पर विवाद
प्रांशु कुमार ने शिकायत दर्ज कर ग्राम पंचायत सचिव विकास साव के नगर पंचायत में कथित समायोजन की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बिना स्पष्ट भर्ती प्रक्रिया या वैधानिक आदेश के किया गया यह समायोजन युवाओं में असंतोष पैदा कर रहा है। मामले की निष्पक्ष जांच और अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की मांग की गई है। - प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने का आरोप
अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राही रामकुमार ध्रुव ने शिकायत की कि उनका प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान लगभग तीन माह पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू करने के लिए आवश्यक अनुमति या कार्य आदेश नहीं मिला है। उनका कहना है कि विभिन्न कारण बताकर उन्हें लगातार कार्यालयों के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। - बिजली बिल विवाद अब भी लंबित
पूर्णिमा जायसवाल ने आरोप लगाया कि मार्च 2025 में गलत मीटर रीडिंग के कारण उन्हें 52 हजार रुपये से अधिक का बिजली बिल जारी किया गया था। कई शिकायतों के बावजूद एक वर्ष बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने वास्तविक खपत के आधार पर संशोधित बिल जारी करने की मांग की है।

प्रशासन का पक्ष
अपर कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय तिवारी ने कहा है कि सभी शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं और प्रत्येक मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इन मामलों के सामने आने के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब लोगों की निगाहें जांच और उसके परिणामों पर टिकी हैं।