
मामला क्या था?
- एक लोक सूचना अधिकारी (PIO) ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी को अत्यधिक विस्तृत और अस्पष्ट बताते हुए पूरी सूचना उपलब्ध नहीं कराई।
- प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने 15 दिनों के भीतर निःशुल्क सूचना देने का निर्देश दिया।
- इसके बाद आवेदक ने Chhattisgarh State Information Commission में दूसरी अपील दायर की।
- आयोग ने PIO पर Right to Information Act, 2005 की धारा 20(1) के तहत जुर्माना लगाया और धारा 20(2) के तहत विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की।
याचिकाकर्ता की दलील
- जुर्माना लगाने से पहले धारा 20(1) के तहत अलग से नोटिस नहीं दिया गया।
- दूसरी अपील की सुनवाई के लिए जारी नोटिस को ही अंतिम नोटिस मान लिया गया, जो कानून के अनुरूप नहीं है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
- अदालत ने कहा कि धारा 20(1) के तहत जुर्माना लगाने से पहले:
- अलग से नोटिस जारी करना,
- और संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देना,
अनिवार्य है।
- अपील की सुनवाई का नोटिस और दंड (Penalty) से पहले का नोटिस दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इन्हें एक नहीं माना जा सकता।
- यदि किसी कानून में कोई विशेष प्रक्रिया निर्धारित है, तो उसका पालन उसी रूप में किया जाना चाहिए।
कोर्ट का फैसला
- हाईकोर्ट ने माना कि राज्य सूचना आयोग ने विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
- इसलिए 6 सितंबर 2022 को पारित जुर्माना लगाने का आदेश रद्द कर दिया।
इस फैसले का महत्व
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि:
- सूचना आयोग सीधे जुर्माना नहीं लगा सकता।
- जुर्माना लगाने से पहले संबंधित लोक सूचना अधिकारी को अलग से कारण बताओ नोटिस और निष्पक्ष सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है।
- इससे प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित होता है।