छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के करीब 3:15 बजे All India Institute of Medical Sciences Raipur में लंबी बीमारी के बाद 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर है।

डॉ. तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज़, अभिनय और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत कर भारत के साथ-साथ एशिया, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों में छत्तीसगढ़ की लोककला का गौरव बढ़ाया।
भारतीय लोककला में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री (1988), पद्म भूषण (2003) और पद्म विभूषण (2019) से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डी.लिट. की उपाधि प्रदान की।
उनके निधन पर नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी भव्य प्रस्तुतियों से छत्तीसगढ़ की पंडवानी कला को विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलाई और उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
वहीं भूपेश बघेल ने उन्हें छत्तीसगढ़ का अनमोल रत्न बताते हुए कहा कि उनके निधन से राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश की कला और संस्कृति को बड़ी क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी परंपरा को जीवंत रखते हुए छत्तीसगढ़ का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया।