पॉक्सो मामले में शिक्षक को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज की
Surajpur District के एक सरकारी स्कूल के व्याख्याता द्वारा अपने खिलाफ दर्ज पॉक्सो मामले की एफआईआर निरस्त करने की मांग को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामला एक नाबालिग छात्रा से जुड़ा है और प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का संकेत देता है, इसलिए जांच के शुरुआती चरण में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

क्या है मामला?
याचिकाकर्ता Harkesh Jaiswal वर्ष 2008 से Bhatgaon Government Girls Higher Secondary School में जीव विज्ञान के व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं। उनके खिलाफ पुलिस ने Protection of Children from Sexual Offences Act की धारा 8 तथा Bharatiya Nyaya Sanhita के तहत मामला दर्ज किया है।
शिक्षक का पक्ष
याचिका में शिक्षक ने दावा किया कि:
- वे पिछले 17 वर्षों से सेवा में हैं।
- उनकी पत्नी भी उसी विद्यालय में व्याख्याता हैं।
- उनके खिलाफ पहले कभी कोई शिकायत नहीं हुई।
- वे कथित घटना के समय अपने बच्चों की नीट तैयारी के संबंध में Kota गए हुए थे।
- एक सहकर्मी शिक्षक ने विभागीय और व्यक्तिगत रंजिश के कारण छात्रों एवं अभिभावकों को भड़काकर झूठी शिकायत दर्ज कराई।
एफआईआर में देरी का तर्क
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि कथित घटना 16 फरवरी 2026 की बताई गई है, जबकि एफआईआर 6 अप्रैल 2026 को दर्ज हुई। लगभग 50 दिनों की देरी को उन्होंने शिकायत की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न बताया।
शासन का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि मामला नाबालिग छात्रा से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपों का है। ऐसे मामलों में केवल एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी के आधार पर जांच या आपराधिक प्रक्रिया को समाप्त नहीं किया जा सकता। आरोपों की सत्यता निष्पक्ष पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
हाईकोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने माना कि:
- मामला गंभीर प्रकृति का है।
- आरोप नाबालिग छात्रा से संबंधित हैं।
- प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला बनता है।
- जांच प्रारंभिक चरण में है, इसलिए एफआईआर रद्द करना उचित नहीं होगा।
इसलिए अदालत ने याचिका खारिज करते हुए जांच जारी रखने की अनुमति दी। ध्यान रहे कि एफआईआर दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी सिद्ध होने के समान नहीं है; अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।