दुकान से सामान लेने गई थी बच्ची
मामला दुर्ग जिले के उतई थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, पांच वर्षीय बच्ची 10 अप्रैल को दुकान से सामान लेने गई थी। आरोप है कि आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और उसके साथ अपराध किया।
घटना के बाद बच्ची को गंभीर हालत में एक सुनसान स्थान पर छोड़ दिया गया। वहां से गुजर रहे लोगों की नजर बच्ची पर पड़ी, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

शिकायत के बाद आरोपी गिरफ्तार
घटना की जानकारी मिलने के बाद बच्ची के परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उतई पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी धनेंश्वर साहू उर्फ जनता (40), निवासी बंजारीपारा, उतई को 11 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया।
जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने 25 अप्रैल को न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया।
BNS, POCSO और SC/ST एक्ट के तहत चला मुकदमा
न्यायिक अभिलेख के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की संबंधित धाराओं के तहत अभियोजन चलाया गया।
मामले में अदालत के समक्ष पुलिस की जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई हुई।
विशेष पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद
विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग ने 25 सितंबर को आरोपी को दोषी ठहराया। इसके बाद 26 सितंबर को सजा का आदेश पारित किया गया।
अदालत ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में आजीवन कारावास, 10 वर्ष और 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजाएं सुनाईं। इसके अलावा अलग-अलग धाराओं में कुल 13 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में अदालत के आदेश के अनुसार अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष ने की न्यायालय में पैरवी
मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई में नगर पुलिस अधीक्षक नेवई भारती मरकाम, तत्कालीन उतई थाना प्रभारी निरीक्षक महेश ध्रुव, उप निरीक्षक प्रमोद सिन्हा समेत उतई थाना पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही।
मामले में विशेष लोक अभियोजक रूपवती तेलीदार ने न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि बच्चों के साथ किसी भी तरह के लैंगिक अपराध, शोषण या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें।
पुलिस ने यह भी अपील की है कि ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान और निजता की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए और संवेदनशील जानकारी को अनावश्यक रूप से सार्वजनिक न किया जाए।