रायपुर। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (KTU) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्य अउ पत्रकारिता: आज के चुनौती-कली बर दिशा” विषय पर एक दिवसीय परिचर्चा गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रबुद्ध वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और जीवन मूल्यों को वर्तमान मीडिया परिदृश्य से जोड़ते हुए पत्रकारिता के सामने खड़ी चुनौतियों पर गंभीर मंथन किया।
कार्यक्रम के शुभारंभ में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली और विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा की।

‘संस्कृति के बिना भारत शून्य’
मुख्य वक्ता और विख्यात विचारक प्रवीण गुगनानी ने छत्तीसगढ़ी भाषा की आत्मीयता और भारतीय संस्कृति में छत्तीसगढ़ के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा में असीम अपनापन है और भारत की माटी में छत्तीसगढ़ी संस्कृति का विशेष महत्व है।
उन्होंने कहा कि संस्कृति के बिना भारत शून्य है और आज पत्रकारिता को सांस्कृतिक मूल्यों की सख्त जरूरत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक के इस दौर में एआई में भी भारतीय सांस्कृतिक पहचान को समाहित करने की आवश्यकता है। युवाओं के संस्कृति से दूर होने पर चिंता जताते हुए उन्होंने उनसे प्रतिबद्धता और मनोयोग के साथ अपनी संस्कृति से जुड़ने का आह्वान किया।
AI और तकनीक पत्रकारिता के लिए बड़ी चुनौती
न्यूज 24 मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ एवं लल्लूराम डॉट कॉम के एडिटोरियल डायरेक्टर मनोज सिंह बघेल ने पत्रकारिता में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता का परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। टेक्नोलॉजी और एआई पत्रकारिता के लिए सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों तरह की चुनौतियां लेकर आए हैं।
उन्होंने कहा कि चैटजीपीटी जैसे आसानी से उपलब्ध प्लेटफॉर्म के दौर में नई पीढ़ी के पत्रकारों के सामने तकनीक के साथ तालमेल बनाए रखते हुए अपनी मौलिकता और विश्वसनीयता कायम रखने की बड़ी चुनौती है।
आम जनता की भाषा में हो पत्रकारिता
राष्ट्रवादी विचारक ललित शर्मा ने पत्रकारिता में संवाद की सरल भाषा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाचार उसी भाषा में लिखा जाना चाहिए, जिसे आम जनता आसानी से समझ सके। क्षेत्रीय शब्दों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल भाषा को और समृद्ध बनाता है।
उन्होंने पत्रकारिता के प्रमुख सूत्रों के रूप में सत्य, लोकमंगल, विश्वसनीयता, संवाद, समन्वय और नीति को आवश्यक तत्व बताया।
‘सकारात्मक सामाजिक बदलाव पत्रकारिता से संभव’
वरिष्ठ शिक्षाविद सुरेश देशमुख ने कहा कि समाचारों के माध्यम से होने वाला सामाजिक परिवर्तन अत्यंत प्रभावशाली होता है। मौजूदा दौर में सभ्यता और संस्कृति में सकारात्मक बदलाव लाने में पत्रकारिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य के संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति और भाषा को सही दिशा देने वाले हर प्रयास में आयोग पूर्ण सहयोग करेगा।
सिंधी अकादमी की सुषमा जेठानी ने संस्कृति को समाज की जड़ बताते हुए कहा कि ऐसी खबरें लिखी और दिखाई जानी चाहिए, जिन्हें परिवार के साथ बैठकर देखा जा सके।
छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य को समृद्ध करने प्रतिबद्ध विश्वविद्यालय
KTU के कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस तरह के आयोजनों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य को समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
कार्यक्रम का संचालन विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग की छात्रा तारणी सोनी ने किया। कार्यक्रम के अंत में KTU के कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने अतिथियों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर आभार व्यक्त किया। गोष्ठी के समन्वयक डॉ. आशुतोष मंडावी रहे।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।