November 6, 2026

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों को नियमित यात्री परिवहन से जोड़ने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने एक वर्ष पूरा कर लिया है। 4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से शुरू हुई इस योजना के तहत अब बस्तर और सरगुजा संभाग के 13 जिलों में 106 मार्गों पर 107 बसें संचालित हो रही हैं। योजना से ऐसे 850 गांवों को पहली बार नियमित बस सेवा मिली है, जहां पहले यात्री बस की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

एक साल में इन बसों ने करीब 24 लाख किलोमीटर का सफर तय किया है। वर्तमान में बसें प्रतिदिन लगभग 17,500 किलोमीटर चल रही हैं। अधिसूचित रूट की कुल लंबाई करीब 5,300 किलोमीटर है, जबकि अलग-अलग मार्गों की लंबाई 14 से 105 किलोमीटर तक है। अधिकांश रूट पर रोजाना दो ट्रिप संचालित की जा रही हैं।

34 बसों से शुरू हुआ सफर, अब 107 बसें

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में की थी। शुरुआती चरण में 34 मार्गों पर 34 बसों का संचालन शुरू किया गया था और करीब 250 गांवों को जोड़ा गया था।

एक वर्ष में योजना का विस्तार होकर अब 106 मार्गों और 107 बसों तक पहुंच गया है। पहले चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग के 13 जिलों को शामिल किया गया है। बस्तर संभाग में 51 मार्गों पर 50 बसें, जबकि सरगुजा संभाग में 55 मार्गों पर 57 बसें चल रही हैं।

बस्तर-सरगुजा के 13 जिलों में पहुंची बस सेवा

बस्तर संभाग में सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जिले योजना के दायरे में हैं। वहीं सरगुजा संभाग में सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर, कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में बसों का संचालन किया जा रहा है।

दुर्गम इलाकों में नियमित बस सेवा शुरू होने से ग्रामीणों को स्कूल, अस्पताल, हाट-बाजार, विकासखंड और जिला मुख्यालय तक आने-जाने में सुविधा मिल रही है।

जहां पिकअप था सहारा, वहां अब नियमित बस

बस्तर और सरगुजा के कई ग्रामीण इलाकों में पहले नियमित बस सेवा नहीं होने के कारण लोगों को पिकअप और अन्य वैकल्पिक वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता था। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए लंबी दूरी का सफर विशेष रूप से मुश्किल होता था।

कम यात्री संख्या और दुर्गम रास्तों के कारण निजी बस संचालकों के लिए इन रूटों पर नियमित सेवा चलाना व्यावसायिक रूप से चुनौतीपूर्ण था। इसी अंतर को दूर करने के लिए सरकार ने वित्तीय सहायता आधारित मॉडल के जरिए ग्रामीण बस सेवा शुरू की।

कोंटा-जगरगुंडा जैसे दुर्गम रूट पर भी सुविधा

योजना का असर सुकमा जैसे दूरस्थ इलाकों में भी देखने को मिला है। कोंटा-जगरगुंडा के करीब 83 किलोमीटर लंबे मार्ग पर बस सेवा शुरू होने से ग्रामीणों के लिए आवागमन आसान हुआ है।

इससे स्कूली विद्यार्थियों, मरीजों, कामगारों और हाट-बाजार जाने वाले ग्रामीणों को सुविधा मिली है। ग्रामीण आम, महुआ और अन्य वनोपज बाजार तक पहुंचाने के साथ जरूरी सामान लेकर वापस गांव भी लौट पा रहे हैं।

बस सेवा के साथ गांवों की आर्थिक गतिविधियों को भी सहारा

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का असर केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं है। नियमित बस सेवा के कारण गांवों और हाट-बाजारों के बीच संपर्क बढ़ा है। ग्रामीण अपने कृषि उत्पाद और वनोपज बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं, जबकि बाजार से जरूरत का सामान गांवों तक लाना भी आसान हुआ है।

इसके अलावा ब्लॉक और जिला मुख्यालय तक नियमित आवाजाही से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सरकारी सेवाओं तक ग्रामीणों की पहुंच बेहतर हुई है।

बस संचालकों को सरकार दे रही वित्तीय सहायता

कम यात्री संख्या वाले दुर्गम रूट पर बस संचालन को व्यावहारिक बनाने के लिए राज्य सरकार बस संचालकों को प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता देती है। योजना के तहत प्रथम वर्ष में 26 रुपये प्रति किलोमीटर, दूसरे वर्ष में 24 रुपये और तीसरे वर्ष में 22 रुपये प्रति किलोमीटर सहायता का प्रावधान है।

यह सहायता अधिकतम तीन वर्ष तक दी जाती है। बसों को मासिक मोटरयान कर में भी अधिकतम तीन वर्ष तक छूट का प्रावधान है। अब तक 107 बस संचालकों को करीब 5.77 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है।

इस मॉडल में बसों का स्वामित्व और संचालन निजी संचालकों के पास रहता है। यात्री किराया भी संचालक को मिलता है, जबकि सरकार कठिन और कम यात्री वाले रूट पर संचालन को व्यवहार्य बनाने के लिए निर्धारित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है।

GPS से निगरानी, चले किलोमीटर के आधार पर भुगतान

योजना में बस संचालन की निगरानी के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) का इस्तेमाल किया जा रहा है। MMGBY पोर्टल के जरिए बसों की लोकेशन, ट्रिप, रूट और स्टॉपेज की निगरानी की जाती है।

बस संचालकों को वित्तीय सहायता का भुगतान अधिसूचित मार्ग पर वास्तव में चले किलोमीटर के आधार पर ऑनलाइन VLTD रिपोर्ट के अनुसार किया जाता है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी रिपोर्ट की जांच के बाद भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं।

यात्रियों की सुविधा के लिए बसों की समय-सारिणी बस संगवारी ऐप पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है।

दूसरे चरण में 4,368 गांवों को जोड़ने की तैयारी

योजना के दूसरे चरण में आठ और जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों में बस सेवा का विस्तार करने की तैयारी है। इनमें मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बालोद, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, रायगढ़, कोरबा और धमतरी शामिल हैं।

दूसरे चरण में बस सुविधा से वंचित करीब 4,368 गांवों को योजना के दायरे में लाने की तैयारी है। इससे लगभग 14.57 लाख लोगों को परिवहन सुविधा मिलने की संभावना है। प्रस्तावित चरण में 60 से 80 बसों के संचालन की योजना है।

यात्रियों की सुविधा के लिए बस किराए का भुगतान UPI और QR कोड के जरिए करने की सुविधा भी प्रस्तावित है।

दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों को किराए में छूट

योजना के तहत कुछ विशेष वर्गों के यात्रियों के लिए किराए में छूट का प्रावधान किया गया है। दृष्टिबाधित, बौद्धिक दिव्यांग, दोनों पैरों से चलने में असमर्थ व्यक्तियों, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों तथा HIV/AIDS से प्रभावित व्यक्तियों को सहायक सहित किराए में 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान है।

वहीं कलेक्टर द्वारा प्रमाणित नक्सल प्रभावित व्यक्तियों को किराए में 50 प्रतिशत छूट देने का प्रावधान है।

सीएम साय बोले- दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना लक्ष्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योजना के एक वर्ष पूरा होने पर कहा कि सुदूर गांव में रहने वाले नागरिकों को भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच का समान अवसर मिलना चाहिए। उनके मुताबिक ग्रामीण बस योजना इसी उद्देश्य को जमीन पर उतारने का प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में पहले नियमित यात्री बस नहीं पहुंचती थी, वहां अब ग्रामीण तय समय पर बस से स्कूल, अस्पताल, हाट-बाजार, ब्लॉक और जिला मुख्यालय तक पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने योजना के विस्तार के जरिए अधिक से अधिक बस सुविधा से वंचित गांवों को नियमित यात्री परिवहन से जोड़ने की बात कही।

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